तेहरान/वाशिंगटन/तेल अवीव, 1 मार्च 2026: मध्य पूर्व (Middle East) के इतिहास में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसकी गूंज आने वाले कई दशकों तक पूरी दुनिया में सुनाई देगी। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक अभूतपूर्व और बड़े पैमाने के संयुक्त सैन्य अभियान में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) मारे गए हैं।
ईरान के सरकारी मीडिया (Press TV और IRIB) ने रविवार, 1 मार्च 2026 की सुबह इस बड़ी खबर की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बाद, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही देश भर में सात दिन के सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) का भी ऐलान किया गया है।
यह घटना केवल एक नेता की मौत नहीं है, बल्कि यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान के सत्ता-प्रतिष्ठान पर अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी प्रहार है। 86 वर्षीय खामेनेई, जिन्होंने 37 वर्षों तक ईरान पर एकछत्र और लौह-हस्त (Iron-fisted) शासन किया, की मौत ने पूरे क्षेत्र को एक अनिश्चित और संभावित रूप से विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) के मुहाने पर ला खड़ा किया है।
1. ऑपरेशन की पूरी कहानी: कैसे भेद दिया गया ‘सुप्रीम लीडर’ का अभेद्य किला?
28 फरवरी 2026, शनिवार की रात ईरान की राजधानी तेहरान के लिए कयामत की रात साबित हुई। अमेरिका और इजरायल की वायुसेना और खुफिया एजेंसियों (CIA और Mossad) ने एक अत्यंत गुप्त और अचूक संयुक्त सैन्य अभियान को अंजाम दिया।
‘एपिक फ्यूरी’ और ‘लायंस रोर’ (Operations Epic Fury & Lion’s Roar)
अमेरिकी और इजरायली रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन को ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) और ‘लायंस रोर’ (Lion’s Roar) नाम दिया गया था। इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की लीडरशिप को पूरी तरह से खत्म करना (Decapitation strike) और ‘रेजीम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) का मार्ग प्रशस्त करना था।
- सटीक खुफिया जानकारी: अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA द्वारा उपलब्ध कराए गए सटीक सैटेलाइट इमेजरी और ग्राउंड इंटेलिजेंस के आधार पर इजरायली और अमेरिकी फाइटर जेट्स ने तेहरान स्थित खामेनेई के अत्यधिक सुरक्षित और भूमिगत (Underground) बंकरनुमा आवास को निशाना बनाया।
- भयानक तबाही: मिसाइलों की बौछार इतनी तीव्र थी कि पूरा परिसर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। रविवार सुबह मलबे से खामेनेई का शव बरामद किया गया।
- परिवार और कमांडर्स का खात्मा: ईरानी अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स’ (Fars News) के अनुसार, इस भीषण हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनकी बेटी, दामाद, एक पोती और बहू की भी मौत हो गई। इसके अलावा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के चीफ जनरल मोहम्मद पाकपौर (Gen Mohammad Pakpour) और कई वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक भी इस हमले में मारे गए।

अमेरिकी और इजरायली राष्ट्रपतियों के बयान
हमले के कुछ ही घंटों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस बात की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “इतिहास के सबसे दुष्ट लोगों में से एक खामेनेई मारा गया है। वह हमारे अत्यधिक परिष्कृत ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं सका। यह ईरानी लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा मौका है।”
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि “खामेनेई के जीवित न होने के कई संकेत हैं।” उन्होंने सीधे ईरानी जनता से अपील की कि वे इस ‘कट्टरपंथी शासन’ के खिलाफ उठ खड़े हों।
2. शोक, आंसू और बदला: ईरान के अंदर का वर्तमान माहौल
जब रविवार की सुबह ईरान के सरकारी टीवी चैनलों पर यह खबर ब्रेक की गई, तो माहौल बेहद गमगीन और तनावपूर्ण था।
- लाइव टीवी पर रो पड़े एंकर: न्यूज़ एंकर्स काले कपड़े पहनकर स्क्रीन पर आए। खबर पढ़ते हुए कई एंकर फूट-फूट कर रो पड़े। एक एंकर ने रोते हुए लाइव प्रसारण में कहा, “ट्रम्प को वह कीमत चुकानी पड़ेगी जो आज तक किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं चुकाई है! इंतकाम आ रहा है!”
- 40 दिन का राष्ट्रीय शोक: सरकार ने तुरंत ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित करते हुए देश के सभी सरकारी संस्थानों, स्कूलों और बाजारों को बंद करने का आदेश दिया।
- सड़कों पर उमड़ी भीड़: तेहरान और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में खामेनेई के लाखों समर्थक काले झंडे और उनकी तस्वीरें लेकर सड़कों पर उतर आए हैं और “अमेरिका मुर्दाबाद” व “इजरायल मुर्दाबाद” के नारे लगा रहे हैं।
- विपरीत तस्वीर (जश्न का माहौल): दूसरी ओर, ईरान के बाहर निर्वासित जीवन जी रहे कई ईरानी असंतुष्टों और पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (Reza Pahlavi) ने इस खबर का जश्न मनाया। पहलवी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारे समय का खूंखार हत्यारा इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया है। यह इस्लामी गणराज्य के अंत की शुरुआत है।”
3. कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई? (एक साधारण मौलवी से ‘सुप्रीम लीडर’ तक का सफर)
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि उन्हें ईरान के शिया इस्लामी गणराज्य में ‘ईश्वर के प्रतिनिधि’ के रूप में देखा जाता था। उनके जीवन का सफर ईरान के आधुनिक इतिहास का ही अक्स है।
शुरुआती जीवन और क्रांति में भूमिका
अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को उत्तर-पूर्वी पवित्र शहर मशहद (Mashhad) में एक धार्मिक परिवार में हुआ था। 1960 के दशक की शुरुआत में, वे पवित्र शहर कोम (Qom) चले गए, जहां उन्होंने 1979 की ‘इस्लामी क्रांति’ (Islamic Revolution) के जनक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी (Ayatollah Ruhollah Khomeini) के अधीन शिक्षा प्राप्त की।
जब ईरान के पश्चिमी-समर्थित शासक (शाह मोहम्मद रजा पहलवी) के खिलाफ आंदोलन तेज हुआ, तो खामेनेई ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और उन्हें छिपकर भी रहना पड़ा। 1979 में जब शाह को उखाड़ फेंका गया और खोमैनी ने ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ की स्थापना की, तो खामेनेई उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक बन गए।
राष्ट्रपति काल और जानलेवा हमला
1981 में, अली खामेनेई को भारी बहुमत से ईरान का तीसरा राष्ट्रपति चुना गया। इसी वर्ष जून में, तेहरान की एक मस्जिद में भाषण देते समय उनके पास रखे एक टेप रिकॉर्डर में बम विस्फोट हुआ। इस जानलेवा हमले में उनकी जान तो बच गई, लेकिन उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए लकवाग्रस्त (Paralyzed) हो गया।
सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) का पदभार (1989)
1989 में जब अयातुल्ला खोमैनी का निधन हुआ, तब खामेनेई शिया धार्मिक पदानुक्रम (Hierarchy) में बहुत ऊंचे पद (Grand Ayatollah) पर नहीं थे। वे केवल एक ‘होजत-अल-इस्लाम’ (मध्यम दर्जे के मौलवी) थे। लेकिन उनके राजनीतिक कौशल और सेना के समर्थन के कारण ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने उन्हें देश का अगला ‘सुप्रीम लीडर’ (रहबर) चुन लिया। रातों-रात उन्हें ‘ग्रैंड अयातुल्ला’ का दर्जा दे दिया गया।
4. खामेनेई के 37 वर्षों का লৌह-हस्त शासन (The 37-Year Iron Rule)
जब हम कहते हैं कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित हुआ है, तो हमें यह भी समझना होगा कि उनके शासनकाल का ईरान और दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ा।
खामेनेई ने अपने 37 वर्षों के शासन में ईरान के सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक ढांचे पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
1. IRGC का उदय (आर्थिक और सैन्य ताकत)
ईरान-इराक युद्ध के बाद, जब ईरान की नियमित सेना (Artesh) को मजबूत करने की बात चल रही थी, तब खामेनेई ने ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) का बचाव किया। उन्होंने IRGC को न केवल एक समानांतर सेना बनने दिया, बल्कि उसे ईरान की अर्थव्यवस्था, टेलीकॉम, और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का बादशाह बना दिया। आज IRGC ईरान के सबसे शक्तिशाली और कट्टरपंथी संस्थानों में से एक है।

2. ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (Axis of Resistance) का निर्माण
खामेनेई का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक हथियार उनका ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ था। मध्य पूर्व में इजरायल और अमेरिका के प्रभाव को कम करने के लिए, उन्होंने प्रॉक्सी मिलिशिया का एक विशाल नेटवर्क खड़ा किया।
- लेबनान में हिजबुल्लाह (Hezbollah)
- गाजा पट्टी में हमास (Hamas) और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद
- यमन में हूती विद्रोही (Houthis)
- इराक और सीरिया में कई शिया मिलिशिया गुट खामेनेई के ही नेतृत्व में ईरान ने मध्य पूर्व के कई देशों की राजनीति को परदे के पीछे से नियंत्रित करना शुरू किया।
3. परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program)
यह खामेनेई का ही अडिग रुख था जिसने कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को जीवित रखा। उन्होंने बार-बार दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन पश्चिमी देशों और इजरायल को हमेशा यह डर रहा कि ईरान परमाणु बम बनाने के बेहद करीब है। इसी परमाणु कार्यक्रम ने इजरायल और अमेरिका को शनिवार के इस घातक ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ के लिए प्रेरित किया।
4. घरेलू असंतोष को कुचलना
खामेनेई का शासनकाल घरेलू स्तर पर घोर मानवाधिकार उल्लंघनों और क्रूरता के लिए भी जाना जाएगा। 1999 के छात्र विरोध प्रदर्शनों से लेकर 2009 के ‘ग्रीन मूवमेंट’ और हाल ही में 2022-2023 में महसा अमिनी (Mahsa Amini) की हिरासत में मौत के बाद भड़के हिजाब-विरोधी ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ (Woman, Life, Freedom) आंदोलनों तक, खामेनेई ने हर असंतोष को IRGC और बासिज (Basij) मिलिशिया के जरिए क्रूरता से कुचल दिया।
5. अब आगे क्या? (उत्तराधिकार का गहराता संकट और पावर वैक्यूम)
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान का अगला शासक कौन होगा?
एक सर्वोच्च नेता की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही इजरायल के साथ युद्ध में उलझा है और देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। यह ‘पावर वैक्यूम’ (सत्ता का शून्य) ईरान के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
अंतरिम नेतृत्व परिषद (Interim Leadership Council)
ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार, जब तक नया सुप्रीम लीडर नहीं चुना जाता, तब तक देश का संचालन एक अंतरिम परिषद करेगी। इस परिषद में शामिल हैं:
- राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (Masoud Pezeshkian)
- न्यायपालिका प्रमुख घोलमहोसैन मोहसेनी एजेई (Gholamhossein Mohseni Ejei)
- अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफ़ी (Ayatollah Alireza Arafi) – जिन्हें रविवार को परिषद में शामिल किया गया।
नया सुप्रीम लीडर कौन होगा?
नए सर्वोच्च नेता का चुनाव 88 मौलवियों वाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (Assembly of Experts) द्वारा किया जाएगा। खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में मुख्य रूप से तीन नामों की चर्चा है:
- मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei): अली खामेनेई के 55 वर्षीय दूसरे बेटे। मोजतबा पर्दे के पीछे से IRGC और बासिज मिलिशिया को नियंत्रित करते आए हैं। कई लोगों का मानना था कि उनके पिता उन्हें ही अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे।
- लारिजानी परिवार (The Larijani Family): ईरान के शक्तिशाली राजनीतिक और धार्मिक परिवारों में से एक लारिजानी परिवार का कोई सदस्य भी इस दौड़ में शामिल हो सकता है।
- हसन खोमैनी (Hassan Khomeini): पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खोमैनी के पोते, जो सुधारवादियों (Reformists) के बीच थोड़े लोकप्रिय हैं।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों (जैसे अटलांटिक काउंसिल के विशेषज्ञों) का मानना है कि इस बार असली शक्ति IRGC के हाथों में जा सकती है। IRGC पर्दे के पीछे से अपनी पसंद की एक कठपुतली को सुप्रीम लीडर बना सकती है या फिर देश में सीधे ‘सैन्य तानाशाही’ (Military Dictatorship) लागू कर सकती है।
6. वैश्विक प्रतिक्रियाएं और भारत पर असर (Impact on India and the World)
ईरान में हुए इस तख्तापलट जैसे हमले की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है।
भारत में शिया समुदाय का प्रदर्शन
ईरान के सुप्रीम लीडर को दुनिया भर के शिया मुसलमान अपना आध्यात्मिक नेता (Marja) मानते हैं। भारत में भी इसका गहरा असर देखा जा रहा है।
- श्रीनगर और कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों, विशेषकर श्रीनगर में, हजारों शिया मुसलमान सड़कों पर उतर आए हैं। उनके हाथों में अयातुल्ला खामेनेई की तस्वीरें हैं और वे अमेरिका और इजरायल के खिलाफ भारी नारेबाजी कर रहे हैं।
- लखनऊ और करगिल: उत्तर प्रदेश के लखनऊ (जो शिया संस्कृति का बड़ा केंद्र है) और लद्दाख के करगिल में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं। भारत सरकार ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इन इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है।
ग्लोबल एविएशन (Global Aviation) में हाहाकार
इस हमले और ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से ग्लोबल एविएशन सेक्टर में खलबली मच गई है। कोविड-19 महामारी के बाद यह विमानन क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा व्यवधान (Disruption) है।
- दुबई, दोहा, अबू धाबी और बहरीन जैसे पश्चिम एशिया के व्यस्त हब (Hubs) से होकर गुजरने वाली हजारों अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या उनके रूट बदल दिए गए हैं।
- ईरान, इराक, और सीरिया का एयरस्पेस पूरी तरह से ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ में तब्दील हो चुका है।
मुस्लिम जगत (Islamic World) में विभाजन
सुन्नी बहुल अरब देश (जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र) खुले तौर पर कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक हलकों में वे ईरान की कमजोर होती स्थिति को अपने हित में देख रहे हैं। हालांकि, इराक, सीरिया और लेबनान (जहां शिया आबादी और ईरानी प्रभाव अधिक है) में जनता के बीच भारी गुस्सा है।
7. क्या विश्व युद्ध 3 का खतरा मंडरा रहा है? (The Threat of Retaliation)
जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया, तो साथ ही ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने ‘भीषण प्रतिशोध’ (Massive Retaliation) की कसमें भी खाईं।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी (Ali Larijani) ने धमकी दी है कि ईरान एक ऐसे बल के साथ अमेरिका और इजरायल पर हमला करेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। रविवार को ही ईरान ने अपनी प्रतिक्रिया शुरू कर दी है:
- इजरायल पर मिसाइल हमले: ईरान ने इजरायल के शहर बीट शेमेश (Beit Shemesh) में मिसाइलें दागीं, जिसमें 9 इजरायलियों की मौत की खबर है और 28 लोग घायल हुए हैं।
- तेल अवीव में मौत: शनिवार रात को तेल अवीव पर हुए मिसाइल हमले में एक 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई और 120 लोग घायल हो गए।
अमेरिका का एक्शन: यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मध्य पूर्व में अपने सभी बेस को हाई अलर्ट पर रखा है और अतिरिक्त फाइटर जेट्स को स्टैंडबाय पर रखा है। यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का प्रयास करता है, जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल (Crude Oil) गुजरता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था औंधे मुंह गिर सकती है और कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
निष्कर्ष: इस्लामी गणराज्य के अंत की शुरुआत या एक नए युद्ध का आगाज़?
28 फरवरी 2026 की उस रात ने मध्य पूर्व का नक्शा हमेशा के लिए बदल दिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई का खात्मा ईरान के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिससे उबरना 1979 में स्थापित इस ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ के लिए लगभग असंभव प्रतीत होता है।
जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल इसे ईरान में ‘रेजीम चेंज’ (Regime Change) के एक ऐतिहासिक मौके के रूप में देख रहे हैं, वहीं यह कदम एक अत्यंत खतरनाक जुआ (Dangerous Gamble) भी साबित हो सकता है। एक बिना नेतृत्व वाला, लेकिन हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस ईरान, एक घायल शेर की तरह अधिक आक्रामक हो सकता है। IRGC के हार्डलाइनर्स (कट्टरपंथी) सत्ता को अपने हाथों में लेकर पूरे मध्य पूर्व को आग में झोंक सकते हैं।
आने वाले 40 दिन, जो राष्ट्रीय शोक के लिए निर्धारित किए गए हैं, केवल आंसुओं और मातम के दिन नहीं होंगे। ये दिन यह तय करेंगे कि ईरान का भविष्य गृहयुद्ध (Civil War) के अंधेरे में डूबेगा, या फिर वह दुनिया के साथ एक नए, विनाशकारी और पूर्ण-स्तरीय युद्ध (All-out War) की शुरुआत करेगा।
