“दुश्मन चाहे किसी भी रास्ते से आए, भारत के प्रहरी हर मोर्चे पर मुस्तैद हैं।”
आज की सुबह, यानी 18 फरवरी 2026, गुजरात के समुद्र तट से एक ऐसी खबर आई जिसने देश के दुश्मनों की नींद उड़ा दी है। अरब सागर की लहरों के बीच, पोरबंदर के पास एक ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा हुआ, जिसमें भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अदम्य साहस और सटीक खुफिया जानकारी का परिचय देते हुए नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप को भारत में घुसने से पहले ही पकड़ लिया।
गुजरात एटीएस (Anti-Terrorist Squad), भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) और एनसीबी (NCB) के एक संयुक्त अभियान में पोरबंदर के तट से दूर समुद्र में एक ईरानी स्पीडबोट को इंटरसेप्ट किया गया है। इस नाव से 203 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला नशीला पदार्थ (संभवतः हेरोइन या मेथामफेटामाइन) बरामद किया गया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है।
इस 4000 शब्दों के विशेष ब्लॉग (Mega Report) में, हम इस पूरे ऑपरेशन की ‘इनसाइड स्टोरी’ जानेंगे। आखिर कैसे एजेंसियों को इसकी भनक लगी? बीच समुद्र में कैसे हुआ यह ‘चेज़’? ड्रग्स माफिया गुजरात को ही क्यों निशाना बना रहे हैं? और इस जब्ती का भारत की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा? आइये, विस्तार से समझते हैं।
अध्याय 1: वह काली रात और ऑपरेशन की शुरुआत
यह सब कुछ अचानक नहीं हुआ। इसके पीछे हफ्तों की मेहनत और सटीक इंटेलिजेंस थी।
खुफिया जानकारी (The Intel): सूत्रों के अनुसार, गुजरात एटीएस को कुछ दिन पहले ही एक गुप्त सूचना (Tip-off) मिली थी। जानकारी यह थी कि ईरान या पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट की तरफ से एक संदिग्ध नाव भारतीय जलसीमा (Indian Territorial Waters) की ओर बढ़ रही है। इस नाव में भारी मात्रा में प्रतिबंधित सामान होने की आशंका थी।
जाल बिछाना: सूचना मिलते ही, एटीएस ने भारतीय कोस्ट गार्ड (ICG) के साथ समन्वय किया। इसे एक ‘टॉप सीक्रेट’ मिशन रखा गया।
- समुद्र में तैनाती: कोस्ट गार्ड ने अपने जहाजों और डोर्नियर विमानों को निगरानी के लिए अरब सागर में तैनात कर दिया।
- कमांडो टीम: एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी और स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के कमांडो पूरी तरह हथियारों से लैस होकर मिशन के लिए तैयार हो गए।

अध्याय 2: समुद्र में ‘कैट एंड माउस’ का खेल (The Chase)
17-18 फरवरी की दरम्यानी रात, पोरबंदर तट से सैकड़ों नॉटिकल मील दूर, रडार पर एक संदिग्ध ब्लिप (निशान) दिखाई दिया।
- संदेह गहराया: यह नाव सामान्य मछली पकड़ने वाली नौकाओं से अलग थी। यह एक ‘स्पीडबोट’ थी जो मछली पकड़ने के लिए नहीं, बल्कि तेज़ गति से यात्रा करने के लिए बनी थी।
- इंटरसेप्शन (Interception): कोस्ट गार्ड के जहाज ने उस नाव की ओर बढ़ना शुरू किया। जब सुरक्षा बलों ने उन्हें रुकने की चेतावनी दी, तो नाव ने अपनी गति बढ़ा दी और भागने की कोशिश (Evasive Maneuvers) करने लगी।
- चेतावनी और सरेंडर: भारतीय कोस्ट गार्ड और एटीएस की टीम ने नाव को चारों तरफ से घेर लिया। सूत्रों का कहना है कि हवा में चेतावनी भरी गोलियां (Warning Shots) भी चलाई गई हो सकती हैं। खुद को घिरा देख, नाव पर सवार क्रू मेंबर्स ने सरेंडर कर दिया।
अध्याय 3: 203 किलो का ‘सफेद जहर’ (The Seizure)
जब सुरक्षा बलों ने नाव (Irani Boat) पर चढ़कर तलाशी ली, तो उन्हें वहां मछली पकड़ने का कोई जाल नहीं मिला, बल्कि प्लास्टिक के बड़े-बड़े पैकेट मिले।
- मात्रा: कुल 203 किलोग्राम नशीला पदार्थ।
- प्रकार: फॉरेंसिक जांच के बाद ही पुष्टि होगी, लेकिन प्राथमिक तौर पर यह ‘हाई-ग्रेड हेरोइन’ या ‘क्रिस्टल मेथ’ (Ice) लग रहा है।
- कीमत: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ड्रग्स की कीमतों के आधार पर, इस खेप की कीमत ₹1,000 करोड़ से ₹1,500 करोड़ के बीच हो सकती है। (नोट: कीमत ड्रग्स की शुद्धता पर निर्भर करती है)।
गिरफ्तारी: नाव पर सवार 7 ईरानी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से सैटेलाइट फोन और जीपीएस डिवाइस भी मिले हैं, जिनका इस्तेमाल वे अपने हैंडलर्स (आकाओं) से संपर्क करने के लिए कर रहे थे।
अध्याय 4: ‘गोल्डन क्रिसेंट’ और गुजरात का कनेक्शन
यह पहली बार नहीं है जब गुजरात के तट से ड्रग्स पकड़ा गया है। आखिर ड्रग्स माफिया गुजरात के रास्ते भारत में जहर क्यों घोलना चाहते हैं?
भौगोलिक कारण: गुजरात के पास 1,600 किलोमीटर लंबा समुद्र तट है, जो भारत में सबसे बड़ा है। यह तट पाकिस्तान की समुद्री सीमा के बहुत करीब है।
गोल्डन क्रिसेंट (The Golden Crescent): दुनिया में अफीम और हेरोइन उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र ‘गोल्डन क्रिसेंट’ कहलाता है, जिसमें तीन देश शामिल हैं:

- अफगानिस्तान: दुनिया का सबसे बड़ा अफीम उत्पादक।
- ईरान: ट्रांजिट रूट।
- पाकिस्तान: लॉन्च पैड।
ड्रग्स अफगानिस्तान में पैदा होता है, पाकिस्तान के रास्ते बंदरगाहों (जैसे ग्वादर या कराची) तक पहुंचता है, और वहां से नावों के जरिए इसे गुजरात या मुंबई के तट पर भेजने की कोशिश की जाती है।
अध्याय 5: नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism) का खतरा
यह केवल नशा नहीं, बल्कि आतंकवाद का मामला है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस ड्रग्स सिंडिकेट के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हो सकते हैं।
मॉडल (Modus Operandi):
- ड्रग्स को भारत में बेचा जाता है।
- इससे मिलने वाले पैसे (Hawala Money) का इस्तेमाल कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को फंड करने के लिए किया जाता है।
- इसलिए, 203 किलो ड्रग्स पकड़ना केवल नशे के खिलाफ जीत नहीं है, बल्कि यह एक बड़े आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) नेटवर्क पर चोट है।
अध्याय 6: एजेंसियों का तालमेल – सफलता की कुंजी
इस ऑपरेशन की सबसे खास बात थी विभिन्न एजेंसियों के बीच का समन्वय (Coordination)। अक्सर देखा जाता है कि पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने में देरी होती है, लेकिन गुजरात में ATS, ICG और NCB एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
- गुजरात ATS: इनकी खुफिया जानकारी (Human Intelligence) बहुत सटीक थी।
- Indian Coast Guard: इनकी समुद्री ताकत और त्वरित कार्रवाई (Assets & Speed) ने नाव को भागने नहीं दिया।
- NCB: अब आगे की जांच (फॉरेंसिक और नेटवर्क ट्रैकिंग) में एनसीबी की भूमिका अहम होगी।
गृह मंत्री (Home Minister) ने भी इस सफल ऑपरेशन के लिए सुरक्षा बलों की पीठ थपथपाई है और इसे ‘नशामुक्त भारत’ (Drug-Free India) अभियान की दिशा में एक बड़ी जीत बताया है।
अध्याय 7: आगे की कानूनी प्रक्रिया
पकड़े गए 7 ईरानी नागरिकों और जब्त की गई नाव को पोरबंदर बंदरगाह (Jetty) लाया गया है।
- पूछताछ: एटीएस और केंद्रीय एजेंसियां (IB/RAW) संयुक्त रूप से इन विदेशियों से पूछताछ करेंगी। यह जानने की कोशिश की जाएगी कि भारत में इस ड्रग्स का ‘रिसीवर’ (Receiver) कौन था।
- NDPS एक्ट: सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
- सैटेलाइट फोन: उनके पास मिले सैटेलाइट फोन का डेटा रिकवर किया जाएगा ताकि पाकिस्तान या ईरान में बैठे उनके आकाओं की लोकेशन पता चल सके।
अध्याय 8: समाज पर प्रभाव और हमारी जिम्मेदारी
सोचिए, अगर यह 203 किलो ड्रग्स भारत के शहरों—मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद या पंजाब—में पहुंच जाता, तो कितने युवाओं की जिंदगी बर्बाद होती? एक ग्राम हेरोइन भी किसी को नशे का आदी बनाने के लिए काफी होती है। यहाँ तो 200 किलो से ज्यादा का जखीरा था।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारे सुरक्षा बल दिन-रात हमारी रक्षा कर रहे हैं। लेकिन एक नागरिक के रूप में हमारी भी जिम्मेदारी है। अगर हमें अपने आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि या नशे का कारोबार दिखता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
18 फरवरी 2026 का यह दिन गुजरात एटीएस और कोस्ट गार्ड के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। ऑपरेशन ‘सागर मंथन’ (काल्पनिक नाम) ने साबित कर दिया है कि भारत की समुद्री सीमाएं अभेद्य हैं।
ईरानी नाव और 203 किलो ड्रग्स का पकड़ा जाना ड्रग्स माफियाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है: “भारत में जहर बेचने की कोशिश की, तो सलाखों के पीछे जाओगे या जल समाधि लोगे।”
हम अपनी जांबाज सुरक्षा एजेंसियों को सलाम करते हैं।
जय हिन्द!
