कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में ‘कौशल’ ही है सबसे बड़ा हथियार
इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया एक अभूतपूर्व तकनीकी क्रांति के मुहाने पर खड़ी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग (Machine Learning), और ऑटोमेशन (Automation) न केवल हमारे काम करने के तरीके को बदल रहे हैं, बल्कि इस बात को भी पुनर्परिभाषित कर रहे हैं कि भविष्य में किस तरह की नौकरियों का अस्तित्व रहेगा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से लेकर दुनिया की तमाम आर्थिक संस्थाओं की रिपोर्ट एक ही ओर इशारा करती हैं—आने वाले कुछ ही वर्षों में करोड़ों पुरानी नौकरियां खत्म हो जाएंगी और उनकी जगह ऐसी नई नौकरियां जन्म लेंगी, जिनके लिए बिल्कुल नए प्रकार के तकनीकी और व्यावहारिक कौशल (Skills) की आवश्यकता होगी।
इस तेज़ी से बदलते परिदृश्य में, भारत जैसे युवा देश के लिए अपनी सबसे बड़ी ताकत यानी ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (जनसांख्यिकीय लाभांश) को संरक्षित और सशक्त करना सबसे बड़ी चुनौती है। अगर भारत के युवाओं को समय रहते री-स्किल (Reskill) और अप-स्किल (Upskill) नहीं किया गया, तो यह अवसर एक बड़े आर्थिक संकट में भी बदल सकता है।
इसी गंभीर चुनौती को एक ऐतिहासिक अवसर में बदलने के लिए, भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) ने एक बहुत बड़ा दांव चला है। हाल ही में संपन्न हुए ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ (India AI Impact Summit 2026) के मंच से, केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी ने भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम को पूरी तरह से डिजिटाइज़ करने वाले प्लेटफॉर्म ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ (Skill India Digital Hub – SIDH) के लिए एक नए और आक्रामक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का नारा है— “बढ़ना है तो यहां जुड़ना है” (Badhna Hai Toh Yahan Judna Hai)।
1. अभियान का शंखनाद: “बढ़ना है तो यहां जुड़ना है” (The Launch & The Vision)
22 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ महज एआई पर चर्चा का मंच नहीं था, बल्कि यह भारत के वर्कफोर्स (Workforce) के भविष्य की रूपरेखा तय करने का दिन था। इसी अहम मौके पर कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने ‘बढ़ना है तो यहां जुड़ना है’ अभियान का शुभारंभ किया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत के सुदूर गांवों, कस्बों और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में बैठे युवाओं, महिलाओं और पेशेवरों को यह बताना है कि अब उन्हें नए कौशल सीखने या नौकरी खोजने के लिए भटकने की आवश्यकता नहीं है; यह सब उनके मोबाइल फोन पर ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ के माध्यम से उपलब्ध है। सरकार का यह स्पष्ट संदेश है कि यदि किसी भी नागरिक को अपने करियर में आगे बढ़ना है, तो उसे इस राष्ट्रीय डिजिटल इकोसिस्टम के साथ खुद को जोड़ना ही होगा।
इस अभियान के मूल में एक अत्यंत शक्तिशाली और समावेशी दर्शन छिपा है— “समृद्धि के लिए आजीवन सीखना” (Lifelong Learning for Prosperity — for anyone, anytime, anywhere)। यानी सीखना केवल स्कूल या कॉलेज तक सीमित नहीं है; यह जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है, और सरकार का SIDH प्लेटफॉर्म इस प्रक्रिया का केंद्रीय इंजन है।

2. ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ (SIDH) का डिकोडिंग: यह क्या है और कैसे काम करता है?
अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज जिस प्लेटफॉर्म का प्रचार कर रहे हैं, उसकी तकनीकी और कार्यात्मक क्षमता को समझना बेहद ज़रूरी है। SIDH केवल एक वेबसाइट या सामान्य ऐप नहीं है; यह भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का एक चमत्कार है, जो यूपीआई (UPI) और आधार (Aadhaar) की तर्ज पर बनाया गया है। इसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा संचालित किया जाता है।
वर्तमान स्थिति और स्केल: लॉन्च के कुछ ही समय के भीतर, SIDH ने एक अभूतपूर्व मील का पत्थर पार कर लिया है। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 1.5 करोड़ (15 मिलियन) से अधिक पंजीकृत उम्मीदवार जुड़ चुके हैं, जो इसे भारत के, और संभवतः दुनिया के, सबसे बड़े एकीकृत डिजिटल स्किलिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक बनाता है।
SIDH की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं (Technical Architecture):
- मोबाइल-फर्स्ट और AI-सक्षम (Mobile-First & AI-Enabled): यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह से मोबाइल उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें लगा ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) सिस्टम प्रत्येक यूज़र के इंटरेस्ट (रुचि), पिछली पढ़ाई और करियर गोल्स का विश्लेषण करके उसे पूरी तरह से ‘पर्सनलाइज्ड’ (Personalized) कोर्स रिकमेंडेशन देता है। जैसे नेटफ्लिक्स आपको फिल्में सुझाता है, वैसे ही SIDH आपको आपके भविष्य के लिए सबसे सटीक स्किलिंग कोर्स सुझाएगा।
- एकीकृत लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS): पहले भारत में दर्जनों अलग-अलग सरकारी स्किलिंग योजनाएं थीं, जो अलग-अलग पोर्टल्स पर चलती थीं। SIDH ने उन सभी खंडित (Fragmented) योजनाओं को एक ही छत के नीचे ला खड़ा किया है।
- आधार ई-केवाईसी और डिजिटल क्रेडेंशियल्स (Aadhaar eKYC & Digi-Locker Integration): इसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं है। उम्मीदवार का पंजीकरण आधार ई-केवाईसी (Aadhaar eKYC) और ओटीपी (OTP) लॉगिन के माध्यम से होता है। कोर्स पूरा करने के बाद मिलने वाले सर्टिफिकेट्स ‘डिजिटली वेरिफाइड’ (Digitally Verified) होते हैं।
- QR-कोड आधारित सीवी (QR-Code CVs): यह इस प्लेटफॉर्म का एक बेहद क्रांतिकारी फीचर है। युवाओं को अब कागज़ के रिज़्यूमे लेकर कंपनियों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है। SIDH उन्हें एक क्यूआर-कोड (QR-Code) आधारित डिजिटल सीवी प्रदान करता है, जिसे कोई भी नियोक्ता (Employer) अपने मोबाइल से स्कैन करके उस उम्मीदवार के सभी प्रमाणित स्किल्स और सर्टिफिकेट्स देख सकता है।
- बहुभाषी समर्थन (Multilingual Support): भाषा कभी भी सीखने में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसीलिए SIDH प्लेटफॉर्म 21 से अधिक भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है, जिससे एक ग्रामीण युवा अपनी मातृभाषा में भी कोडिंग या रिटेल मैनेजमेंट के गुर सीख सकता है।
3. ‘महानायक’ का मास्टरस्ट्रोक: अमिताभ बच्चन को ही ब्रांड फेस क्यों चुना गया? (The Bachchan Factor)
भारत सरकार की किसी भी योजना को जन-आंदोलन बनाने के लिए एक ऐसे चेहरे की आवश्यकता होती है जिस पर देश का हर नागरिक—चाहे वह कश्मीर का हो या कन्याकुमारी का, अमीर हो या गरीब—आंख मूंदकर भरोसा कर सके। अमिताभ बच्चन का ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ के साथ जुड़ना कोई सामान्य मार्केटिंग रणनीति नहीं है, यह एक ‘ट्रस्ट-बिल्डिंग’ (Trust-building) का महाप्रयास है।
- विश्वसनीयता और जन-अपील (Credibility & Mass Appeal): अमिताभ बच्चन की आवाज़ और उनके चेहरे में एक ऐसा अधिकार (Authority) और अपनापन है, जो भारत के किसी अन्य सेलिब्रिटी में शायद ही हो। जब बिग बी स्क्रीन पर आकर युवाओं से कहते हैं कि “बढ़ना है तो यहां जुड़ना है”, तो यह किसी विज्ञापन की तरह नहीं, बल्कि एक घर के बड़े-बुज़ुर्ग की सही सलाह की तरह लगता है।
- सरकारी अभियानों का सफल ट्रैक रिकॉर्ड: अतीत में हम देख चुके हैं कि पल्स पोलियो अभियान (दो बूंद ज़िंदगी की) और स्वच्छ भारत अभियान (दरवाज़ा बंद) में अमिताभ बच्चन की अपील ने पूरे देश के व्यवहार (Behavioral Change) को बदलने में जादुई भूमिका निभाई थी। सरकार को उम्मीद है कि SIDH के मामले में भी वह ‘अमिताभ फैक्टर’ काम करेगा और करोड़ों युवा इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।
- पीढ़ियों के बीच का सेतु (Bridging the Generations): स्किलिंग की ज़रूरत केवल 18 साल के युवा को नहीं है, बल्कि 45 साल के उस पेशेवर को भी है जिसकी नौकरी AI के कारण खतरे में है। अमिताभ बच्चन एक ऐसे स्टार हैं जिन्हें आज की ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) से लेकर ‘बूमर्स’ (Boomers) तक सभी पसंद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।
4. हर वर्ग के लिए अवसर: SIDH का ‘टारगेट ऑडियंस’ कौन है? (Democratizing Opportunity)
‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ किसी एक विशेष वर्ग के लिए नहीं बनाया गया है। यह एक अत्यंत समावेशी (Inclusive) इकोसिस्टम है, जो समाज के हर उस व्यक्ति के लिए दरवाज़े खोलता है जो आगे बढ़ना चाहता है:
- छात्र और युवा (Students & Job Seekers): जो छात्र अभी स्कूल या कॉलेज में हैं, वे SIDH के माध्यम से अपने करियर पाथवे (Career Pathways) का खाका खींच सकते हैं। वे अपनी रेगुलर पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के लिए ज़रूरी एआई, रोबोटिक्स, या डिजिटल मार्केटिंग के शॉर्ट-टर्म कोर्सेज़ कर सकते हैं।
- कामकाजी पेशेवर (Working Professionals): तकनीक के बदलाव के कारण जो लोग अपनी मौजूदा नौकरी में खुद को अप्रासंगिक (Obsolete) महसूस कर रहे हैं, वे अपनी स्किल्स को अपग्रेड (Upskill) करने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।
- उद्यमी और स्टार्टअप्स (Aspiring Entrepreneurs): जो युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर स्ट्रक्चर्ड सपोर्ट (Structured Support), मेंटरशिप प्रोग्राम्स और मार्केट की समझ विकसित करने वाले कोर्सेज़ मिलेंगे।
- दिव्यांगजन और महिलाएं (Differently-abled & Women): SIDH ने पहुंच की बाधाओं (Barriers of Access) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली ट्रेनिंग मिलने से महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी बढ़ेगी, और विशेष फीचर्स के कारण दिव्यांगजन भी अपनी सुविधा अनुसार सीख सकेंगे।

5. इंडिया स्टैक (India Stack) से SIDH तक: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत
लॉन्च इवेंट के दौरान मंत्री जयंत चौधरी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही: “भारत की डिजिटल ताकत को ‘इंडिया स्टैक’ जैसी परिवर्तनकारी पहलों के माध्यम से विश्व स्तर पर मान्यता मिली है, और अब ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ उसी कड़ी का अगला बड़ा कदम है।”
इस कथन का अर्थ समझना अर्थव्यवस्था के छात्रों के लिए बेहद ज़रूरी है। ‘इंडिया स्टैक’ (India Stack) भारत सरकार द्वारा विकसित खुले डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक सेट है (जैसे आधार, यूपीआई, डिजिलॉकर)। जिस तरह यूपीआई (UPI) ने भारत में वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) ला दिया और आज रेहड़ी-पटरी वाला भी डिजिटल पेमेंट ले रहा है, ठीक उसी तरह SIDH का लक्ष्य ‘एजुकेशनल और स्किलिंग समावेशन’ लाना है।
पहले अच्छी स्किल ट्रेनिंग केवल बड़े शहरों के महंगे संस्थानों में ही उपलब्ध थी, जहाँ गरीब बच्चा पहुंच नहीं पाता था। SIDH ने इस एकाधिकार (Monopoly) को तोड़ दिया है। यह सूचना, भाषा और साख (Credibility) की बाधाओं को खत्म करके व्यापक स्तर पर अवसरों का लोकतंत्रीकरण (Democratizing opportunity at scale) कर रहा है।
6. एआई (AI) और ऑटोमेशन के युग में SIDH की रणनीतिक भूमिका (The Era of AI)
हम एक ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जिसे ‘चौथी औद्योगिक क्रांति’ (Fourth Industrial Revolution) कहा जा रहा है। ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के मंच से इस अभियान का लॉन्च होना कोई संयोग नहीं था। यह एक रणनीतिक संदेश था।
आने वाले समय में कोडिंग, डेटा एंट्री, बेसिक कस्टमर सर्विस जैसी कई नौकरियां एआई (ChatGPT, Gemini आदि) द्वारा ले ली जाएंगी। ऐसे में इंसानों को उन कौशलों में पारंगत होना पड़ेगा जो मशीनें आसानी से नहीं कर सकतीं—जैसे क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking), कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग (Complex Problem Solving), एआई प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (AI Prompt Engineering), ग्रीन एनर्जी तकनीकें और उन्नत मैन्युफैक्चरिंग।
SIDH के कोर्सेज़ को विशेष रूप से उद्योग-संरेखित (Industry-aligned) और भविष्य-के-लिए-तैयार (Future-ready) बनाया गया है। यह प्लेटफॉर्म लगातार डेटा का विश्लेषण करता है कि बाज़ार में किस तरह के स्किल्स की भारी मांग है, और उसी के अनुसार अपने लर्निंग मॉड्यूल्स को अपडेट करता है। यह नागरिकों को एक ऐसा केंद्रीय इंजन प्रदान करता है जिससे वे अपने करियर को ‘भविष्य-प्रूफ’ (Future-proof) बना सकें।
7. बजट 2026-27 और भारत का ‘ग्लोबल स्किल कैपिटल’ बनने का विज़न
भारत सरकार का लक्ष्य केवल अपने घरेलू बाज़ार की ज़रूरतों को पूरा करना नहीं है। यूरोप, जापान, और कई पश्चिमी देश इस समय भारी ‘एजिंग पॉपुलेशन’ (बुजुर्ग होती आबादी) की समस्या से जूझ रहे हैं। वहां काम करने वाले युवाओं की भारी कमी है। दूसरी ओर, भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है।
- जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend): अगर भारत के युवाओं को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से ट्रेन कर दिया जाए, तो भारत पूरी दुनिया की ‘स्किल्ड वर्कफोर्स’ की सप्लाई चेन बन सकता है।
- ग्लोबल स्किल कैपिटल (Global Skill Capital): SIDH इसी बड़े विज़न—भारत को ‘वैश्विक कौशल राजधानी’ बनाने—के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
- बजट 2026-27 के साथ तालमेल: हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट में भी सरकार ने रोज़गार और कौशल विकास (Skilling Thrust) पर विशेष ज़ोर दिया है। SIDH उस बजटीय विज़न की ही तकनीकी रीढ़ (Backbone) है। यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार द्वारा स्किलिंग पर खर्च किया जा रहा पैसा सीधे और पारदर्शी तरीके से सही उम्मीदवार तक पहुंचे।
8. चुनौतियां और समाधान का रास्ता (Challenges and the Road Ahead)
हालांकि ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ कागज़ पर और अपनी प्रारंभिक अवस्था में एक मास्टरपीस नज़र आता है, लेकिन भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में इसे पूरी तरह से सफल बनाने के लिए कुछ बड़ी चुनौतियों से पार पाना होगा:
- डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): आज भी ग्रामीण भारत के एक बड़े हिस्से में हाई-स्पीड इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुलभता एक मुद्दा है। इसके समाधान के लिए सरकार को टेलीकॉम कंपनियों और सीएससी (Common Service Centres) के साथ मिलकर अंतिम मील (Last-mile) तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करनी होगी।
- ड्रॉपआउट दर (Dropout Rates): ऑनलाइन लर्निंग का सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू यह है कि इसमें ‘ड्रॉपआउट’ (बीच में कोर्स छोड़ देने वालों) की संख्या बहुत अधिक होती है। अमिताभ बच्चन के प्रचार से लोग जुड़ तो जाएंगे, लेकिन उन्हें अंत तक कोर्स में बनाए रखने के लिए प्लेटफॉर्म पर ‘गेमिफिकेशन’ (Gamification) और मेंटरशिप का अत्यधिक इंटरैक्टिव मॉडल लागू करना होगा।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी (Private Sector Participation): इस प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले सर्टिफिकेट्स की असली कीमत तभी है जब प्राइवेट कंपनियां (TCS, Infosys, Reliance आदि) नियुक्ति के समय इन क्रेडेंशियल्स को महत्व दें। सरकार को कॉरपोरेट जगत के साथ मिलकर इस प्लेटफॉर्म के ‘प्लेसमेंट इंजन’ (Placement Engine) को अधिक सशक्त बनाना होगा।
‘विकसित भारत’ की ओर एक मज़बूत कदम
“बढ़ना है तो यहां जुड़ना है”—यह महज़ एक आकर्षक पंचलाइन नहीं है, बल्कि यह बदलते हुए नए भारत की एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। जब ‘स्किल इंडिया डिजिटल हब’ (SIDH) जैसी आधुनिक तकनीक का मिलन अमिताभ बच्चन जैसी भरोसेमंद और युगों को बांधने वाली शख्सियत से होता है, तो उसका प्रभाव निश्चित रूप से परिवर्तनकारी होगा।
जिस गति से भारत ‘विकसित भारत 2047’ (Viksit Bharat 2047) की ओर बढ़ रहा है, उसमें एआई (AI) और ऑटोमेशन के तूफानी बदलावों से पार पाने का एकमात्र रास्ता निरंतर सीखते रहना (Lifelong Learning) है। SIDH ने शिक्षा और रोजगार के बीच की जो खाई पाटने की पहल की है, वह प्रशंसनीय है। यह प्लेटफॉर्म न केवल पहुंच, सूचना और भाषा की बाधाओं को तोड़ रहा है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए अवसरों को सही मायने में ‘डेमोक्रेटाइज़’ (लोकतंत्रीकृत) कर रहा है।
अब समय आ गया है कि देश का हर युवा, हर पेशेवर और हर नागरिक इस इकोसिस्टम का लाभ उठाए। क्योंकि अंततः, एक राष्ट्र की असली ताकत उसकी इमारतों या हथियारों में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के हाथों के हुनर और दिमाग के कौशल में बसती है। अमिताभ बच्चन की गूंजती हुई आवाज़ के साथ शुरू हुआ यह अभियान निस्संदेह भारत के स्किलिंग परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात करेगा।
