अहमदाबाद : रंग, उमंग और भाईचारे का त्योहार होली (Holi) और धुलेंडी (Dhuleti) पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुजरात में भी धुलेंडी को लेकर युवाओं और बच्चों में एक अलग ही जोश देखने को मिलता है। लेकिन इस वर्ष 2026 की होली अहमदाबाद और उसके आस-पास के जिलों के लिए एक बेहद डरावना और दर्दनाक सपना बनकर आई है।
त्योहार की मस्ती और जोश के बीच लापरवाही का ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला जिसने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। अहमदाबाद में होली-धुलेंडी के दौरान हादसे, 25 से ज्यादा की मौत की खबर ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। महज 48 घंटों के भीतर पानी में डूबने, भीषण सड़क दुर्घटनाओं और आपसी झड़पों के कारण इतने बड़े पैमाने पर हुई जनहानि ने प्रशासन और आम जनता दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस विस्तृत न्यूज़-ब्लॉग में हम इन हृदयविदारक घटनाओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे, जानेंगे कि आखिर ये हादसे कैसे हुए, और भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
The Dark Shadow over the Festival: रंगों के त्योहार पर मातम का साया
मार्च के पहले सप्ताह में जब पूरा अहमदाबाद शहर सतरंगी गुलाल और पानी की बौछारों से सराबोर था, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह जश्न इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। धुलेंडी (Dhuleti 2026) के दिन सुबह से ही शहर की सड़कों पर हुड़दंग और रंग-गुलाल का खेल शुरू हो गया था। लेकिन दोपहर होते-होते पुलिस कंट्रोल रूम (Police Control Room) और 108 एंबुलेंस सेवा के फोन की घंटियां लगातार बजने लगीं।
आंकड़ों के अनुसार, अहमदाबाद शहर, ग्रामीण इलाकों और उससे सटे जिलों (जैसे गांधीनगर, साबरकांठा और महिसागर) में अलग-अलग घटनाओं में 25 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी। मृतकों में 11 साल के मासूम बच्चों से लेकर 25 साल तक के युवा शामिल हैं। किसी घर का इकलौता चिराग बुझ गया, तो किसी परिवार ने अपने जवान बेटे को हमेशा के लिए खो दिया।
इस महाविनाशकारी दिन को मुख्य रूप से तीन प्रकार के हादसों में बांटा जा सकता है:
- पानी में डूबने की घटनाएं (Drowning Incidents)
- तेज रफ्तार और नशे में ड्राइविंग के कारण सड़क हादसे (Fatal Road Accidents)
- रंग लगाने को लेकर हिंसक झड़पें (Violent Clashes)
Drowning Tragedies: साबरमती और नर्मदा कैनाल में मौत की छलांग
अहमदाबाद में होली-धुलेंडी के दौरान हादसे, 25 से ज्यादा की मौत के पीछे सबसे बड़ा कारण पानी में डूबने (Drowning) की घटनाएं रहीं। धुलेंडी खेलने के बाद शरीर से रंग छुड़ाने के लिए बड़ी संख्या में युवा साबरमती नदी, नर्मदा कैनाल और आस-पास के तालाबों में नहाने उतर गए। पानी की गहराई और तेज बहाव का अंदाजा न होने के कारण यह स्नान उनके जीवन का अंतिम स्नान बन गया।
1. साबरमती नदी का खौफनाक मंजर (Sabarmati Riverfront Tragedy)
अहमदाबाद की जीवनदायिनी साबरमती नदी इस दिन काल का ग्रास बन गई। शहर के कोतरपुर (Kotarpur) और भाट (Bhat) इलाके के पास साबरमती नदी में नहाने गए कई युवा गहरे पानी में डूब गए।
- घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रंग खेलने के बाद 4-5 दोस्तों का एक समूह नदी के किनारे नहाने उतरा था। उनमें से एक युवक का पैर फिसला और वह गहरे पानी में जाने लगा।
- उसे बचाने के चक्कर में उसके अन्य दोस्त भी पानी में कूद पड़े और अंडरकरंट (तेज बहाव) में फंस गए।
- फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की गोताखोर टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद नदी से शवों को बाहर निकाला। इनमें से कुछ की मौके पर ही मौत हो चुकी थी, जबकि एकाध ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
2. नर्मदा कैनाल और स्थानीय तालाबों में मौत का तांडव (Narmada Canal and Lakes)
गांधीनगर और अहमदाबाद की सीमा से गुजरने वाली नर्मदा मुख्य कैनाल (Narmada Main Canal) और इसकी उप-नहरों में भी कई डूबने के मामले दर्ज किए गए।
- सांतेज और कलोल की घटना: नर्मदा कैनाल के पास रंग धोते समय अचानक पैर फिसलने से कई लोग नहर के तेज बहाव में बह गए। नहर की ढलान सीमेंट की होती है और उस पर काई (Algae) जमी होने के कारण वह बेहद फिसलन भरी हो जाती है। एक बार कोई इसमें गिर जाए, तो बिना बाहरी मदद के बाहर निकलना लगभग असंभव होता है।
- महिसागर और अरवल्ली (Surrounding Areas): अहमदाबाद से सटे महिसागर जिले के कोठंबा (Kothamba) के पास नाका तालाब में नहाने गए 4 युवकों की डूबने से मौत हो गई। इसी तरह अरवल्ली में 5वीं और 6वीं कक्षा में पढ़ने वाले दो चचेरे भाई तालाब में डूब गए, जिससे पूरे गांव में मातम पसर गया।
“त्योहारों पर हम लगातार चेतावनी जारी करते हैं कि गहरे पानी से दूर रहें। कैनाल और नदियों में नहाने पर सख्त पाबंदी है, इसके बावजूद युवा जोश में आकर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। एक ही दिन में इतने शव नदी-नहरों से निकालना हमारे रेस्क्यू जवानों के लिए भी बेहद मानसिक पीड़ा का काम है।” – चीफ फायर ऑफिसर, अहमदाबाद।\

Fatal Road Accidents: सड़क हादसे और ‘Drunk Driving’ का कहर
त्योहारों के दौरान शराब और अन्य नशीले पदार्थों (जैसे भांग) का सेवन दुर्घटनाओं का एक बहुत बड़ा कारण बनता है। धुलेंडी के दिन अहमदाबाद के प्रमुख मार्गों पर तेज रफ्तार (Overspeeding) और हुड़दंग के कारण कई भीषण सड़क हादसे (Road Accidents) हुए।
ओवरस्पीडिंग और हिट-एंड-रन के मामले (Hit and Run & Stunts)
शहर के एसजी हाईवे (SG Highway), एसपी रिंग रोड (SP Ring Road) और सिंधु भवन रोड (SBR) पर युवाओं ने ट्रिपल राइडिंग और बाइक पर स्टंट करते हुए ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ा दीं।
- वस्त्रापुर (Vastrapur) में बुजुर्ग की मौत: एक दर्दनाक घटना में, वस्त्रापुर इलाके में मानसी सर्कल के पास सड़क पार कर रहे एक 84 वर्षीय बुजुर्ग को एक तेज रफ्तार कार ने कुचल दिया। आरोपी कार चालक धुलेंडी की मस्ती में कार दौड़ा रहा था और हादसे के बाद मौके से फरार हो गया।
- वटवा (Vatva) में ट्रक से टक्कर: एसपी रिंग रोड पर रोपड़ा क्रॉसरोड के पास एक 19 वर्षीय युवक की बाइक अनियंत्रित होकर एक खड़े ट्रक में जा घुसी। युवक ने न तो हेलमेट पहना था और न ही ट्रक की पार्किंग लाइट्स चालू थीं। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
- गोटा (Gota) में सिक्योरिटी गार्ड की जान गई: एसजी हाईवे पर एक 60 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड को बेकाबू टू-व्हीलर ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी भी मौत हो गई।
अहमदाबाद ट्रैफिक पुलिस (Traffic Police) ने रात भर ‘ड्रंक एंड ड्राइव’ (Drunk and Drive) का विशेष अभियान चलाया और सैकड़ों वाहन जब्त किए, लेकिन तब तक कई लोगों की जान जा चुकी थी।
Clashes and Violence: रंग लगाने को लेकर हिंसक झड़पें और हत्याएं
‘बुरा न मानो होली है’ का नारा अक्सर कुछ लोगों के लिए दूसरों के साथ दुर्व्यवहार करने का लाइसेंस बन जाता है। इस बार धुलेंडी पर जबरन रंग लगाने और पुरानी रंजिश निकालने के कारण शहर के कई इलाकों में खून-खराबा देखने को मिला।
- मामूली विवाद ने लिया खूनी रूप: शहर के कुछ पूर्वी इलाकों (East Ahmedabad) में रंग लगाने और डीजे (DJ) पर गाना बजाने को लेकर दो गुटों में कहासुनी हो गई। शराब के नशे में यह विवाद इतना बढ़ गया कि लाठी, डंडे और पत्थर चलने लगे।
- इन हिंसक झड़पों में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल में इलाज के दौरान कुछ लोगों ने दम तोड़ दिया। पुलिस को इन इलाकों में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त बल (Riot Police) तैनात करना पड़ा।
Civil Hospital Emergency: अहमदाबाद के अस्पतालों में मची अफरा-तफरी
जब अहमदाबाद में होली-धुलेंडी के दौरान हादसे, 25 से ज्यादा की मौत का यह तांडव चल रहा था, तब शहर के अस्पतालों, विशेषकर एशिया के सबसे बड़े अस्पताल ‘अहमदाबाद सिविल अस्पताल’ (Ahmedabad Civil Hospital) के ट्रॉमा सेंटर का नजारा युद्ध के मैदान जैसा था।
अस्पताल प्रशासन ने एमरजेंसी (EMRI 108) के बढ़ते मामलों को देखते हुए पहले से ही डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी थीं।
अस्पतालों में आए मुख्य केसेस (Categories of Medical Emergencies):
- माथा और हड्डियों की चोट (Orthopedic & Neuro Trauma): बाइक स्लिप होने और एक्सीडेंट्स के कारण ब्रेन हैमरेज और फ्रैक्चर के सैकड़ों मरीज भर्ती किए गए।
- केमिकल रंगों से नुकसान (Chemical Color Reactions): बाजार में बिकने वाले सस्ते और जहरीले रासायनिक रंगों (Industrial chemicals) के कारण लोगों की आंखों की कॉर्निया डैमेज होने और त्वचा के बुरी तरह जलने (Skin burns & Allergies) के 300 से अधिक मामले ओपीडी (OPD) में आए।
- पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग: मिलावटी मिठाइयां और भांग के अत्यधिक सेवन के कारण डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग के केस भी बड़ी संख्या में देखे गए।
Role of Police and Administration: क्या प्रशासन इन हादसों को रोक सकता था?
इतने बड़े पैमाने पर हुई जनहानि के बाद स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि क्या प्रशासन और पुलिस की कोई चूक रही?
अहमदाबाद पुलिस (Ahmedabad Police) ने त्योहार से पहले ही एक सख्त एडवाइजरी और नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि:
- किसी भी व्यक्ति पर जबरन रंग न फेंकें।
- कैनाल और नदियों के पास न जाएं।
- शराब या भांग पीकर वाहन न चलाएं।
पुलिस ने चप्पे-चप्पे पर गश्त भी बढ़ाई थी, लेकिन एक ही दिन में लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरी भीड़ की हर गतिविधि को नियंत्रित करना किसी भी प्रशासन के लिए लगभग असंभव हो जाता है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और सुनसान नहरों के पास जहां पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं होती, वहां लोग चोरी-छिपे नहाने चले जाते हैं।
यह केवल प्रशासन की विफलता नहीं है, बल्कि समाज और नागरिकों के रूप में हमारे ‘सिविक सेंस’ (Civic Sense) की भारी कमी का भी परिणाम है।
Psychological Aspect: त्योहारों में हादसे क्यों बढ़ते हैं? (Why Festivals Turn Fatal)
होली जैसे खुशियों के त्योहार में अचानक मौतों का ग्राफ क्यों बढ़ जाता है? इसके पीछे कई गहरे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण छिपे हैं:
- ‘आज तो त्योहार है’ की मानसिकता (Festival Exemption Mentality): लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि त्योहार के दिन नियम तोड़ना (जैसे बिना हेलमेट घूमना, 3 लोग बाइक पर बैठना, ओवरस्पीडिंग) जायज है और पुलिस उन्हें कुछ नहीं कहेगी।
- हीरोइज्म और सोशल मीडिया (Heroism for Social Media Reels): आज के युवा अपनी जान की परवाह किए बिना खतरनाक जगहों (जैसे नदी की गहराई या तेज रफ्तार बाइक) पर जाकर इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) बनाने का जोखिम उठाते हैं। चंद लाइक्स के लिए वे अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं।
- अभिभावकों की लापरवाही (Lack of Parental Supervision): माता-पिता अपने किशोर बच्चों को बाइक और पैसे देकर छोड़ देते हैं। वे कहां जा रहे हैं, किसके साथ हैं और क्या कर रहे हैं, इसकी कोई निगरानी नहीं होती। जब पुलिस या अस्पताल से फोन आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
- ‘पियर प्रेशर’ (Peer Pressure): दोस्तों के समूह में कोई व्यक्ति कमजोर नहीं दिखना चाहता। अगर एक दोस्त नदी में छलांग लगाता है, तो दूसरा भी अपनी बहादुरी साबित करने के लिए ऐसा ही करता है, भले ही उसे तैरना न आता हो।
Prevention and Action Plan: भविष्य के लिए सबक और सुरक्षा के उपाय (Safety Guidelines)
इस वर्ष की धुलेंडी ने गुजरात और विशेष रूप से अहमदाबाद के लोगों को एक बहुत ही कड़वा सबक दिया है। इन मौतों को वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हमें कठोर कदम उठाने होंगे।
1. कड़े प्रशासनिक कदम (Strict Administrative Control):
- अगले साल से नर्मदा कैनाल और साबरमती नदी के संवेदनशील घाटों पर पुलिस बल के साथ-साथ ड्रोन (Drone Surveillance) से भी निगरानी की जानी चाहिए।
- जो भी व्यक्ति प्रतिबंधित जल क्षेत्रों के पास पाया जाए, उस पर भारी जुर्माना (Heavy Penalty) लगाया जाना चाहिए।
2. शैक्षिक जागरूकता (Educational Awareness):
- स्कूलों और कॉलेजों में त्योहारों से पहले अनिवार्य रूप से ‘फेस्टिवल सेफ्टी वर्कशॉप’ (Festival Safety Workshop) का आयोजन होना चाहिए, जिसमें छात्रों को पानी के खतरों और सड़क सुरक्षा के बारे में बताया जाए।
3. माता-पिता की जिम्मेदारी (Responsibility of Parents):
- त्योहारों पर बच्चों को वाहन देने से पहले उन्हें सख्त हिदायत दें।
- बच्चों को समझाएं कि रंग छुड़ाने के लिए घर के बाथरूम का इस्तेमाल करें, न कि किसी अनजान तालाब या नहर का।
खुशियां मनाएं, मातम नहीं
अहमदाबाद में होली-धुलेंडी के दौरान हादसे, 25 से ज्यादा की मौत की यह डरावनी सच्चाई हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वास्तव में त्योहार मना रहे हैं या अपनी मौत को दावत दे रहे हैं?
त्योहार जीवन में नीरसता दूर करने और प्रेम फैलाने के लिए आते हैं। लेकिन क्षणिक रोमांच (Momentary Thrill) के लिए अपनी जान जोखिम में डालना किसी भी दृष्टिकोण से बहादुरी नहीं है। जिन परिवारों ने इस धुलेंडी पर अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए होली के रंग अब हमेशा के लिए काले हो गए हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करे और उनके परिवारों को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति दे।
आइए, हम सब यह संकल्प लें कि हम अपने त्योहारों को सुरक्षित, मर्यादित और जिम्मेदारी के साथ मनाएंगे, ताकि भविष्य में कभी किसी त्योहार पर ऐसे मातम की खबरें न पढ़नी पड़ें।
