‘धुरंधर 2’ का सिनेमाघरों में ऐतिहासिक आगमन
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ही फिल्में ऐसी होती हैं जो रिलीज से पहले ही एक ‘पॉप कल्चर फेनोमेनन’ (Pop Culture Phenomenon) बन जाती हैं। साल 2025 के अंत में रिलीज हुई निर्देशक आदित्य धर (Aditya Dhar) की फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) ने दर्शकों के दिलों और बॉक्स ऑफिस दोनों पर जो अमिट छाप छोड़ी थी, उसने इसके सीक्वल के लिए उम्मीदों को आसमान पर पहुंचा दिया था। आज, 19 मार्च 2026 को (गुड़ी पड़वा, उगादी और ईद-उल-फितर के शुभ अवसर पर) इस महाकाव्य का दूसरा और अंतिम भाग— ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (Dhurandhar: The Revenge) या ‘धुरंधर 2’ सिनेमाघरों में दस्तक दे चुका है।
क्या यह फिल्म अपने पहले भाग की भारी सफलता और उम्मीदों पर खरी उतर पाई है? क्या लगभग 4 घंटे (229 मिनट) का रनटाइम दर्शकों को सीट से बांधे रखने में सफल रहा है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, बॉक्स ऑफिस पर इसने ‘पठान’, ‘स्त्री 2’ और ‘ओजी’ (OG) जैसे दिग्गजों के रिकॉर्ड कैसे चकनाचूर कर दिए?
1. कहानी और पटकथा (Plot and Storyline): बदले की आग और जासूसी का खतरनाक खेल
धुरंधर: द रिवेंज वहीं से शुरू होती है जहाँ इसका पहला भाग खत्म हुआ था। यह फिल्म एक साधारण कहानी नहीं है; यह एक अंडरकवर भारतीय खुफिया एजेंट, जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) के ‘हमजा अली मजारी’ में बदलने और उसके द्वारा किए गए विनाशकारी लेकिन सुनियोजित प्रतिशोध (Revenge) की गाथा है।
कहानी का मूल आधार:
अगर पहली फिल्म ‘धुरंधर’ पाकिस्तान के अंडरवर्ल्ड (विशेषकर कराची के लयारी इलाके) में घुसपैठ करने और रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) के साम्राज्य को समझने के बारे में थी, तो यह दूसरी फिल्म उस साम्राज्य को अंदर से खोखला करने और पूरी तरह से नष्ट करने पर केंद्रित है। हमजा का मिशन केवल कुछ गुंडों को मारना नहीं है; उसका लक्ष्य 26/11 के मुंबई हमलों का बदला लेना और पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य शक्ति-ढांचे (Power Structures) को हिलाकर रख देना है।

छह अध्यायों (Six Chapters) में बंटी महागाथा:
आदित्य धर ने इस फिल्म को छह अलग-अलग अध्यायों में विभाजित किया है। यह ‘चैप्टराइज्ड’ (Chapterised) नरेटिव दर्शकों को 4 घंटे की फिल्म में भी उलझे रहने से बचाता है। फिल्म हमें 2002 के एक फ्लैशबैक में ले जाती है, जहाँ हम जसकीरत के परिवार के साथ हुए अन्याय और उसके एक खूंखार एजेंट में तब्दील होने की पृष्ठभूमि को समझते हैं। इसी दौरान आईबी डायरेक्टर अजय सान्याल (आर. माधवन) उसे खोजते हैं और ‘धुरंधर’ बनाते हैं।
कथा का यह हिस्सा भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाओं—जैसे डिमोनेटाइजेशन (नोटबंदी), 2014 के आम चुनाव, और यहाँ तक कि प्रयागराज (इलाहाबाद) के एक बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड—के साथ फिक्शन को इतनी खूबसूरती से मिलाता है कि दर्शक यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या यह वास्तव में फिक्शन है या सच्चाई?
2. धुरंधर: द रिवेंज मूवी रिव्यू – निर्देशन और तकनीकी पहलू (Direction & Technical Brilliance)
आदित्य धर का ‘विज़नरी’ निर्देशन (Aditya Dhar’s Masterclass):
‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के बाद आदित्य धर ने साबित कर दिया था कि वे एक्शन और मिलिट्री थ्रिलर के उस्ताद हैं। लेकिन धुरंधर: द रिवेंज मूवी रिव्यू रिव्यू लिखते समय यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उन्होंने अपनी ही कला को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है। 229 मिनट (लगभग 3 घंटे 49 मिनट) लंबी फिल्म बनाना और उसमें एक सेकंड के लिए भी बोरियत न आने देना, आज के ‘शॉर्ट अटेंशन स्पैन’ वाले युग में एक जादुई उपलब्धि है।
उन्होंने फिल्म के स्केल (Scale) को बहुत बड़ा रखा है। क्लोज-अप शॉट्स से लेकर टॉप-एंगल ड्रोन शॉट्स तक का ट्रांजिशन इतना स्मूथ है कि यह एक हॉलीवुड स्तर की हॉरर/एक्शन फिल्म का अहसास देता है।
सिनेमैटोग्राफी और वीएफएक्स (Cinematography & VFX):
विकास नौलखा (Vikash Nowlakha) की सिनेमैटोग्राफी में एक रस्टिक (Rustic) और कच्चापन है। हाथ में पकड़े हुए (Handheld) कैमरे के शॉट्स एक्शन दृश्यों में एक तरह की बेचैनी (Anxiety) पैदा करते हैं, जो दर्शकों को सीधा कराची की सड़कों पर खड़ा कर देता है। YRF स्पाई यूनिवर्स की तुलना में, यहाँ ग्रीन-स्क्रीन का उपयोग बहुत कम और यथार्थवादी (Realistic) है।
बैकग्राउंड स्कोर (BGM by Shashwat Sachdev):
पहली फिल्म का BGM एक ‘कल्ट’ बन चुका था। इस सीक्वल में शाश्वत सचदेव का संगीत एक्शन दृश्यों को एक अलग ही ऊंचाई (Pulsating beats) देता है। हालांकि कुछ क्रिटिक्स का मानना है कि पहले भाग जितना जादू गानों में नहीं है, लेकिन अरिजीत सिंह द्वारा गाया गया इमोशनल क्लाइमैक्स ट्रैक और ‘गहरा हुआ’ का सैड वर्जन रोंगटे खड़े कर देता है।
3. अभिनय (Performances): रणवीर सिंह का ‘कैरियर-डिफाइनिंग’ अवतार
जब हम धुरंधर: द रिवेंज मूवी रिव्यू की बात करते हैं, तो यह पूरी फिल्म एक आदमी के कंधों पर टिकी है, और वह हैं रणवीर सिंह।
रणवीर सिंह (हमजा अली मजारी / जसकीरत सिंह रांगी):
रणवीर सिंह ने इस फिल्म में अपनी अभिनय क्षमता का हर वो पन्ना खोल दिया है जो अब तक दर्शकों से छिपा था। पहले भाग में उन्होंने एक संयमित (Restrained) भूमिका निभाई थी, लेकिन ‘द रिवेंज’ में उनका असली ‘बीस्ट मोड’ (Beast Mode) सामने आता है। एक तरफ उनकी आंखों में अपने अतीत का भयानक दर्द और भेद्यता (Vulnerability) है, तो दूसरी तरफ दुश्मनों के लिए एक क्रूर और निडर दरिंदगी। जब वे स्क्रीन पर होते हैं, तो आप किसी और को नहीं देख सकते। यह निस्संदेह उनके करियर का सबसे शानदार, सबसे शक्तिशाली और अवार्ड-विनिंग परफॉरमेंस है।
अर्जुन रामपाल (मेजर इकबाल – Major Iqbal):
एक हीरो तभी महान बनता है जब उसका विलेन खूंखार हो। अर्जुन रामपाल ने पाकिस्तानी ISI चीफ मेजर इकबाल के रूप में जो आतंक पैदा किया है, वह आपको स्क्रीन पर उनसे नफरत करने पर मजबूर कर देगा। उनका और रणवीर सिंह का फेस-ऑफ (Face-off) सीक्वेंस भारतीय सिनेमा के बेहतरीन एक्शन दृश्यों में से एक के रूप में याद रखा जाएगा।
संजय दत्त (एसपी चौधरी / असलम):
संजय दत्त का स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा की तरह भारी-भरकम है। फर्स्ट हाफ में वे कहानी को लीड करते हैं और उनके डार्क ह्यूमर वाले सीन्स तनाव भरे माहौल में एक राहत (Comic relief) का काम करते हैं।
आर. माधवन और अन्य सपोर्टिंग कास्ट:
आईबी डायरेक्टर के रूप में आर. माधवन (R Madhavan) का शांत और सधा हुआ अभिनय फिल्म को एक ग्रेविटी (Gravitas) प्रदान करता है। राकेश बेदी (Jameel Jamali) राजनेता के रूप में बेहतरीन हैं। बाल कलाकार सारा अर्जुन (Sara Arjun) का स्क्रीन टाइम भले ही कम हो, लेकिन उनका प्रभाव बहुत गहरा है।
अक्षय खन्ना (रहमान डकैत) की अनुपस्थिति निश्चित रूप से महसूस होती है, लेकिन फिल्म की गति इतनी तेज है कि आप जल्द ही नए किरदारों की दुनिया में खो जाते हैं।
4. बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: इतिहास का सबसे बड़ा ‘पेड प्रीव्यू’ धमाका (Box Office Tsunami)
अब आते हैं उस पहलू पर जिसने ट्रेड पंडितों (Trade Analysts) की नींद उड़ा दी है। धुरंधर 2 बॉक्स ऑफिस कलेक्शन केवल एक आंकड़ा नहीं रह गया है; यह भारतीय सिनेमा के लिए एक केस स्टडी बन गया है।
निर्माताओं (Jio Studios और B62 Studios) ने आधिकारिक रिलीज (19 मार्च) से एक शाम पहले, 18 मार्च (बुधवार) को पूरे भारत और विदेशों में ‘पेड प्रीव्यू’ (Paid Previews) शोज़ आयोजित किए थे।
पेड प्रीव्यू कलेक्शन (The Record-Shattering Numbers):
- ग्लोबल ग्रॉस (Worldwide Gross): Sacnilk और अन्य ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने केवल पेड प्रीव्यू शोज़ से ही दुनिया भर में ₹ 75 करोड़ का चौंकाने वाला ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है!
- घरेलू कमाई (India Net): भारत में 12,000 से अधिक शोज़ से फिल्म ने लगभग ₹ 44 करोड़ (Net) और ₹ 52.75 करोड़ (Gross) की कमाई की।
- ओवरसीज (Overseas): विदेशों में इस फिल्म ने केवल प्रीव्यू से ₹ 22.25 करोड़ कमा लिए।

टूटे कौन-से बड़े रिकॉर्ड?
- स्त्री 2 (Stree 2): बॉलीवुड में अब तक सबसे बड़े पेड प्रीव्यू का रिकॉर्ड ‘स्त्री 2’ (लगभग ₹ 10 करोड़) के नाम था। रणवीर सिंह की इस फिल्म ने उस आंकड़े को चार गुना से भी अधिक के अंतर से कुचल दिया है।
- ओजी (OG): पवन कल्याण की फिल्म ‘OG’ के ₹ 25 करोड़ के प्रीमियर रिकॉर्ड को भी इसने मीलों पीछे छोड़ दिया है।
पहले दिन की कमाई का तूफान (Day 1 Box Office Prediction):
गुरुवार सुबह (Day 1) के रुझान और भी अधिक डरावने (सकारात्मक रूप से) हैं। सुबह 7 से 11 बजे के शोज़ में ही फिल्म ने लगभग ₹ 17 करोड़ (Net) की कमाई कर ली है।
- शाहरुख खान की ‘पठान’ (Pathaan) ने स्पाई-थ्रिलर जॉनर में पहले दिन ₹ 57 करोड़ का रिकॉर्ड बनाया था। ‘धुरंधर 2’ ने (पेड प्रीव्यू + डे 1 मॉर्निंग) मिलाकर सुबह 11 बजे तक ही ₹ 61 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है!
- अनुमान (Estimate): यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि यदि हम प्रीव्यू और डे 1 के आधिकारिक आंकड़ों को मिला दें, तो फिल्म अपनी ओपनिंग पर ₹ 100 करोड़ से ₹ 120 करोड़ (Net India) का आंकड़ा पार कर सकती है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ओपनर्स (Biggest Openers) में से एक बना देगा।
(नोट: यह भी तब है जब तकनीकी कारणों से दक्षिण भारत (हैदराबाद आदि) में कुछ डब शोज़ और मिडनाइट शोज़ रद्द करने पड़े थे, अन्यथा यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था।)
5. राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव: प्रोपेगेंडा या शुद्ध देशभक्ति? (Political Undertones)
एक निष्पक्ष Dhurandhar The Revenge Review: इसके राजनीतिक झुकाव (Political leaning) पर चर्चा किए बिना अधूरा है।
आदित्य धर कभी भी अपनी फिल्मों में अपनी विचारधारा (Ideology) को छिपाते नहीं हैं। फिल्म में स्पष्ट रूप से ‘नए भारत’ (New India) की आक्रामकता को दिखाया गया है। “घुस के मारेंगे” का जो वादा पहले भाग में किया गया था, वह यहाँ पूरी तरह से चरितार्थ होता है।
- फिल्म में “चायवाला” (Chaiwallah) और उत्तर प्रदेश के “ईमानदार” शासक जैसे स्पष्ट राजनीतिक संदर्भ (References) दिए गए हैं।
- एक दृश्य में एलपीजी (LPG) सिलेंडरों के विस्फोट को एक मास्टरप्लान के रूप में दिखाया गया है, जो दर्शकों को ताली बजाने पर मजबूर कर देता है।
कुछ आलोचकों (Critics) का मानना है कि फिल्म सरकार के पक्ष में थोड़ा ज्यादा झुकी हुई (Appeasing tone) है और कभी-कभी यह भारत बनाम पाकिस्तान के मुद्दे को ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ के रूप में चित्रित करने की सीमा पर चलती है। हालांकि, आदित्य धर का सिनेमाई क्राफ्ट (Craft) इतना मजबूत है कि यह राजनीतिक संदेश (Messaging) फिल्म की कहानी (Storytelling) पर हावी नहीं हो पाता। एक आम दर्शक के लिए, यह शुद्ध एड्रेनालाईन (Adrenaline) और देशभक्ति का महासागर है जहाँ वह सिर्फ ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाना चाहता है।
6. सकारात्मक और नकारात्मक पहलू (The Good & The Bad)
क्या अच्छा है (What Works):
- रणवीर सिंह का प्रदर्शन: आप रणवीर से प्यार कर बैठेंगे। उनका ट्रांसफॉर्मेशन अचूक है।
- क्लाइमैक्स और ट्विस्ट्स: फिल्म का अंतिम आधा घंटा (Pre-climax to Climax) मास्टरक्लास है। वह सरप्राइज जिसके लिए फिल्म बिल्ड-अप कर रही होती है, आपके पैरों तले जमीन खिसका देगा।
- डिटेलिंग और वर्ल्ड-बिल्डिंग: कराची के अंडरवर्ल्ड का सेटअप।
- फोर्थ-वॉल ब्रेकिंग एंडिंग: फिल्म का अंत एक गजब की गहराई (Depth) छोड़ जाता है।
क्या बेहतर हो सकता था (What Doesn’t Work):
- लंबाई (Runtime): 4 घंटे की फिल्म हर किसी के बस की बात नहीं है। फर्स्ट हाफ में कुछ दृश्य थोड़े धीमे (Sluggish) लगते हैं, जिन्हें एडिट करके 15-20 मिनट कम किया जा सकता था।
- बैकग्राउंड म्यूजिक: यद्यपि अच्छा है, लेकिन पहले भाग की तुलना में यह थोड़ा कमजोर लगता है।
- पहला हाफ: पहले भाग में दुनिया को स्थापित करने का जो सूक्ष्म (Nuanced) तरीका था, वह इस बार थोड़ा कम दिखाई देता है।
धुरंधर: द रिवेंज कोई साधारण सीक्वल नहीं है; यह एक ‘सिनेमैटिक मॉन्स्टर’ है जो दर्शकों की नब्ज को बहुत अच्छी तरह से पहचानता है। निर्देशक आदित्य धर दर्शकों की बुद्धिमत्ता (Intelligence) का सम्मान करते हैं और एक ऐसी फिल्म पेश करते हैं जो जोर से बोलती है, आक्रामक है, और किसी भी चीज के लिए माफी नहीं मांगती (Unapologetic)।
यदि आप 4 घंटे का समय लेकर सिनेमाघर जा रहे हैं, तो यकीन मानिए, यह फिल्म आपको एक मिनट के लिए भी स्क्रीन से नजरें नहीं हटाने देगी। इंटरवल के बाद का हिस्सा (Second Half) इस फिल्म की असली जान है, जो आपको खड़े होकर ताली बजाने पर मजबूर कर देगा।
रणवीर सिंह ने दिखा दिया है कि जब उन्हें सही निर्देशक मिलता है, तो वे कैमरे के सामने किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जो सुनामी लेकर आई है, वह अगले कई हफ्तों तक थमने वाली नहीं है।
हमारी रेटिंग (Star Rating): ⭐⭐⭐⭐½ (4.5/5 Stars) एक शब्द में समीक्षा: मास्टरपीस! काम से छुट्टी लें, लेकिन इसे मिस न करें! (SKIP work but watch it!)

भावेश Tez Khabri के सह-संस्थापक और प्रबंध संपादक हैं। अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे पत्रकारिता के माध्यम से समाज में पारदर्शिता लाने का प्रयास कर रहे हैं। भावेश जी मुख्य रूप से राजनीति, क्राइम और शिक्षा से जुड़ी खबरों का नेतृत्व करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि हर खबर पूरी तरह से सत्यापित (Verified) हो।
