शिवालिक जहाज

तनावग्रस्त दुनिया और भारत की ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती

वर्तमान में दुनिया एक अभूतपूर्व भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट से गुजर रही है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Global Supply Chains) को बुरी तरह से बाधित कर दिया है। इस युद्ध का सबसे बड़ा खामियाजा दुनिया के समुद्री व्यापार और विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस) के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है, इस संघर्ष से अछूता नहीं रहा। देश में पिछले कुछ हफ्तों से रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत की खबरें आ रही थीं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जिसे दुनिया के तेल व्यापार की ‘शह-रग’ कहा जाता है, वहां युद्धपोतों और मिसाइलों के साये में व्यापारिक जहाजों का गुजरना लगभग नामुमकिन हो गया था।

1. ‘शिवालिक’ जहाज की ऐतिहासिक यात्रा: मौत के मुहाने से सुरक्षित वापसी

जब भी कोई वाणिज्यिक जहाज (Commercial Vessel) किसी युद्धग्रस्त क्षेत्र से गुजरता है, तो उस पर सवार नाविकों और उस देश की सरकार की सांसें अटकी रहती हैं। ‘शिवालिक’ (Shivalik) जहाज की यात्रा भी किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं थी।

विशालकाय जहाज और उसका बेशकीमती कार्गो (Cargo)

‘शिवालिक’ एक वेरी लार्ज गैस कैरियर (VLGC) है, जो विशेष रूप से महासागरों के पार बड़ी मात्रा में गैस के परिवहन के लिए डिज़ाइन किया गया है।

  • कुल माल (Tonnage): यह जहाज अपने साथ 46,000 मीट्रिक टन लिक्विड LPG लेकर आया है।
  • घरेलू सिलेंडरों के बराबर: ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, 46,000 मीट्रिक टन गैस का अर्थ है कि इससे भारत में उपयोग होने वाले 14.2 किलोग्राम के लगभग 32.4 लाख स्टैंडर्ड घरेलू सिलेंडर भरे जा सकते हैं।
  • आयातकर्ता (Importer): इस गैस का ऑर्डर भारत की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी ‘इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन’ (IOCL) द्वारा दिया गया था।

मुंद्रा और मंगलुरु में होगी अनलोडिंग

सोमवार शाम 5:00 बजे जब शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा, तो बंदरगाह के अधिकारियों ने राहत की सांस ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे 46,000 टन के कार्गो को एक ही जगह नहीं उतारा जाएगा।

  • लगभग 20,000 मीट्रिक टन गैस गुजरात के मुंद्रा (Mundra) पोर्ट पर उतारी जाएगी, जिससे उत्तर और पश्चिम भारत की गैस आपूर्ति सुचारू होगी।
  • शेष 26,000 मीट्रिक टन गैस को लेकर यह जहाज कर्नाटक के मंगलुरु (Mangaluru) पोर्ट की ओर प्रस्थान करेगा, ताकि दक्षिण भारत में भी LPG की कमी को दूर किया जा सके।
शिवालिक जहाज

2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): दुनिया का सबसे खतरनाक ‘चोकपॉइंट’

यह समझना बहुत जरूरी है कि शिवालिक जहाज का होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकलना इतनी बड़ी खबर क्यों है।

भौगोलिक और रणनीतिक महत्व

होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के बीच स्थित एक बहुत ही संकरा समुद्री मार्ग है। इसके उत्तर में ईरान है और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।

  • दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा: दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा अकेले इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और यूएई से निकलने वाला तेल और गैस इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुंचता है।
  • भारत की भारी निर्भरता: 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पहले, भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक हिस्सा, प्राकृतिक गैस का 30% और LPG का 85% से 90% हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर आता था।

युद्ध छिड़ने के बाद, ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले पश्चिमी देशों के जहाजों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी थीं और यह इलाका मिसाइल हमलों के हाई अलर्ट पर था। ऐसे में किसी भी जहाज का वहां फंसना भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर सकता था।

3. भारत की कूटनीतिक विजय: कैसे मिला शिवालिक को सुरक्षित रास्ता?

युद्ध के समय में केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि ‘सॉफ्ट पावर’ और कूटनीति (Diplomacy) सबसे बड़े हथियार होते हैं। जब शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा, तो इसके पीछे पर्दे के पीछे चल रही भारत की अथक कूटनीतिक कोशिशें थीं।

एस. जयशंकर का ‘रीजन एंड कोऑर्डिनेट’ (Reason and Coordinate) फॉर्मूला

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक बार फिर अपनी विदेश नीति का लोहा मनवाया है। ‘फाइनेंशियल टाइम्स यूके’ (Financial Times UK) को दिए गए एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि संकट के समय ईरान से बातचीत बंद कर देना (Disengage) कोई समाधान नहीं है।

  • उन्होंने कहा, “भारत के दृष्टिकोण से, यह बेहतर है कि हम तर्क करें (Reason), हम समन्वय करें (Coordinate) और समाधान निकालें, बजाय इसके कि हम कुछ न करें।”
  • भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए तेहरान (ईरान की राजधानी) के साथ सीधी और निरंतर बातचीत स्थापित की। इसी बातचीत का व्यावहारिक (Practical) परिणाम था कि ईरान ने भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी जहाजों (शिवालिक और नंदा देवी) को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार करने की विशेष अनुमति प्रदान की।

ईरान का रुख: “भारत हमारा दोस्त है”

ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि, अब्दुल मजीद हकीम इलाही (Abdul Majid Hakeem Ilahi) ने न्यूज़ एजेंसी ANI को बताया कि ईरानी अधिकारियों ने कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने में मदद की है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और प्रवक्ता एस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य “खुला है, लेकिन हमारे दुश्मनों और उन लोगों के लिए बंद है जिन्होंने हम पर कायरतापूर्ण हमले किए।” उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर क्षेत्र में असुरक्षा पैदा करने का आरोप लगाया, लेकिन भारत जैसे तटस्थ और मित्र देशों के लिए एक केस-टू-केस आधार (Case-by-case basis) पर सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) का भरोसा दिया।

हालाँकि, विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि अभी तक सभी भारतीय जहाजों के लिए कोई ‘ब्लैंकेट अरेंजमेंट’ (पूर्ण स्थायी छूट) नहीं हुआ है, बल्कि हर जहाज की निकासी के लिए अलग से समन्वय किया जा रहा है।

4. मुंद्रा पोर्ट पर सरकार की ‘वीआईपी’ व्यवस्था और प्राथमिकता (Priority Berthing)

देश में एलपीजी की भारी मांग और कमी को देखते हुए, भारत सरकार और बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) ने किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए खास इंतजाम किए थे।

  • प्राथमिकता के आधार पर बर्थिंग (Priority Berthing): मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश कुमार सिन्हा (Rajesh Kumar Sinha) ने नई दिल्ली में ‘पश्चिम एशिया के घटनाक्रम’ पर एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए बताया कि मुंद्रा पोर्ट पर शिवालिक जहाज के लिए पहले से ही सभी दस्तावेजीकरण (Documentation) पूरे कर लिए गए थे।
  • जहाज के पहुंचते ही उसे तुरंत बर्थ (लंगर डालने की जगह) प्रदान की गई ताकि गैस की अनलोडिंग में एक मिनट की भी देरी न हो।
  • यह ‘फास्ट-ट्रैक’ दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि सरकार आम नागरिकों तक रसोई गैस पहुंचाने के लिए ‘मिशन मोड’ में काम कर रही है।

5. भारत में LPG संकट: दहशत, प्रभाव और समाधान

जब से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा था, भारतीय उपभोक्ताओं में गैस की किल्लत का डर (Panic) बैठ गया था।

संकट का जमीनी असर

  • लंबी कतारें और घबराहट: कई टियर-2 और टियर-3 शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें देखी जाने लगी थीं। लोग एडवांस में गैस बुक (Panic Booking) करने लगे थे।
  • होटल और रेस्तरां पर मार: सबसे ज्यादा असर छोटे होटलों, रेस्तरां और सड़क किनारे ढाबा चलाने वालों पर पड़ा। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति कम होने से उनके व्यापार पर ताला लगने की नौबत आ गई थी।
  • सरकार के आपातकालीन कदम: संकट को देखते हुए, पर्यावरण नियामकों ने आतिथ्य सत्कार (Hospitality) व्यवसायों को एक महीने के लिए बायोमास, रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF) पेलेट्स और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने की अस्थायी अनुमति दे दी थी। साथ ही, घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन (Kerosene) की भी अस्थायी वापसी की गई।

शिवालिक के आने से क्या बदलेगा?

जैसे ही यह खबर फैली कि शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा, बाजार में एक मनोवैज्ञानिक राहत दौड़ गई।

  • 32.4 लाख सिलेंडरों के बराबर गैस का भारतीय बाजार में उतरना सप्लाई चेन को फिर से जिंदा कर देगा।
  • तेल एवं गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि 5 मार्च के बाद से देश में घरेलू LPG का उत्पादन भी 36% तक बढ़ा दिया गया है। रिफाइनरियां अपनी 100% क्षमता पर काम कर रही हैं।
  • सरकार ने आश्वासन दिया है कि घरेलू LPG उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और अब ‘पैनिक बुकिंग’ करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

6. फारस की खाड़ी में फंसे अन्य भारतीय जहाजों का क्या होगा? (‘नंदा देवी’ और ‘जग लाडकी’)

शिवालिक जहाज का सुरक्षित पहुंचना केवल एक शुरुआत है। भारतीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, अभी भी कई जहाज इस क्षेत्र में मौजूद हैं।

  • LPG कैरियर ‘नंदा देवी’ (Nanda Devi): शिवालिक के साथ ही एक और भारतीय ध्वज वाला LPG टैंकर ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज को पार कर चुका है। यह जहाज 17 मार्च (मंगलवार) को गुजरात के कांडला (Kandla) या वाडीनार बंदरगाह पर पहुंचेगा। नंदा देवी के पास भी 47,000 मीट्रिक टन के करीब गैस है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा अनलोडिंग के बाद तमिलनाडु भेजा जाएगा।
  • कच्चे तेल का जहाज ‘जग लाडकी’ (Jag Laadki): एलपीजी के अलावा, यूएई से चला भारतीय पोत ‘जग लाडकी’ भी पूरी तरह सुरक्षित है। यह जहाज 81,000 टन ‘मर्बन क्रूड ऑयल’ (Murban Crude Oil) लेकर भारत आ रहा है, जो देश के पेट्रोल-डीजल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
  • 22 जहाज और 611 नाविक अभी भी खाड़ी में: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शिवालिक और नंदा देवी के निकलने के बाद, फारस की खाड़ी (होर्मुज के पश्चिम में) में अभी भी 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों पर कुल 611 भारतीय नाविक (Seafarers) सवार हैं।
  • नाविकों की सुरक्षा: स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने देश को आश्वस्त किया है कि सभी 611 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में उनके साथ कोई भी अप्रिय घटना (Untoward incident) सामने नहीं आई है। भारतीय नौसेना (Indian Navy) और विदेश मंत्रालय इन सभी जहाजों की कड़ी निगरानी कर रहे हैं।
शिवालिक जहाज

7. इस संकट से भारत को क्या सबक लेना चाहिए?

एक भू-राजनीतिक और ऊर्जा अर्थशास्त्री (Energy Economist) की हैसियत से, जब हम इस पूरी घटना का विश्लेषण करते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा नीतियों (Energy Security Policies) में बड़े बदलाव करने की आवश्यकता है।

1. आयात का विविधीकरण (Diversification of Imports): आज भी भारत अपनी 85-90% एलपीजी के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है। यह निर्भरता भारत की ‘एच्लीस हील’ (Achilles Heel – सबसे बड़ी कमजोरी) है। भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और कुछ अफ्रीकी देशों के साथ एलपीजी और प्राकृतिक गैस के दीर्घकालिक (Long-term) अनुबंध करने होंगे। हालांकि परिवहन लागत (Freight Cost) अधिक हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से यह अत्यंत आवश्यक है।

2. रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) को बढ़ाना: जिस तरह भारत के पास कच्चे तेल के लिए अंडरग्राउंड ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व’ (SPR) हैं (जैसे मंगलुरु, पाडुर और विशाखापत्तनम में), उसी तरह एलपीजी और प्राकृतिक गैस के लिए भी विशाल रणनीतिक भंडारण क्षमता विकसित करनी होगी। वर्तमान में हमारी गैस भंडारण क्षमता केवल कुछ हफ्तों की है। इसे बढ़ाकर कम से कम 60 से 90 दिन करना होगा, ताकि किसी युद्ध की स्थिति में देश की जनता को ‘पैनिक’ का सामना न करना पड़े।

3. नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और इलेक्ट्रिक कुकिंग: लंबे समय के लिए, जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भरता कम करनी होगी। भारत सरकार की सौर ऊर्जा पहलों और ‘सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ (PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana) को तेज़ी से लागू करना होगा ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग एलपीजी से हटकर इंडक्शन कुकटॉप्स (Induction Cooktops) और सौर चूल्हों की ओर बढ़ सकें।

4. नौसेना की ‘ब्लू वाटर’ क्षमता का विस्तार: इस संकट ने साबित कर दिया है कि व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए एक शक्तिशाली नौसेना होना कितना जरूरी है। भारतीय नौसेना को अपने युद्धपोतों की तैनाती फारस की खाड़ी से लेकर स्वेज नहर तक और अधिक बढ़ानी होगी ताकि भारतीय व्यापारिक जहाजों को ‘एस्कॉर्ट’ (Escort) किया जा सके।

8. डिजिटल भारत: गैस वितरण को सुचारू बनाने में तकनीक का रोल

इस संकट काल में, गैस वितरण में होने वाली कालाबाजारी को रोकने के लिए तकनीक (Technology) ने एक बड़ा रोल निभाया है।

  • सरकारी ब्रीफिंग के अनुसार, रविवार के आंकड़ों के हिसाब से करीब 90% गैस बुकिंग ऑनलाइन हुई है।
  • गैस की डिलीवरी के समय ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ (Delivery Authentication Code – DAC) का उपयोग भी 53% से बढ़कर 72% हो गया है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि गैस सही उपभोक्ता के हाथों में ही पहुंचे और कोई बिचौलिया इसका फायदा उठाकर ऊंचे दामों पर ब्लैक-मार्केटिंग न कर सके।
  • सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों ने पीएनजी (PNG – Piped Natural Gas) कनेक्शन लेने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर दी है और 500 रुपये की मुफ्त गैस जैसे आकर्षक ऑफर भी दिए हैं ताकि एलपीजी सिलेंडरों पर से दबाव कम किया जा सके।

एक नए, आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता कदम

शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा — यह केवल सात शब्दों का एक वाक्य नहीं है; यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक जीत का ऐलान है। यह खबर इस बात का प्रतीक है कि आज का भारत वैश्विक मंच पर एक मूकदर्शक (Silent Spectator) नहीं है।

जब दुनिया के बड़े-बड़े पश्चिमी देश अपनी नौसेना की पूरी ताकत लगाने के बावजूद लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित नहीं निकाल पा रहे हैं, तब भारत अपनी ‘सॉफ्ट पावर’, तटस्थ कूटनीति और सदियों पुराने द्विपक्षीय संबंधों के दम पर अपने जहाजों को सुरक्षित स्वदेश ला रहा है।

शिवालिक और नंदा देवी के भारत पहुंचने से न केवल देश के घरों का चूल्हा जलता रहेगा, बल्कि छोटे होटलों और रेस्तरां मालिकों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी। यह घटना भारत के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) भी है कि हमें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) की ओर और भी तेजी से कदम बढ़ाने होंगे।

जब तक हमारी कूटनीति मजबूत है और हमारे नाविक अडिग हैं, तब तक दुनिया का कोई भी युद्ध भारत के विकास के पहिए को रोक नहीं सकता। जय हिन्द!

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