राष्ट्रीय एंटी-टेरर नीति ‘PRAHAAR

“रिएक्टिव” से “प्रोएक्टिव” सुरक्षा की ओर भारत का ऐतिहासिक कदम

किसी भी राष्ट्र का विकास और उसकी आर्थिक समृद्धि सीधे तौर पर उसकी आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) से जुड़ी होती है। जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं और देश के भीतर शांति का माहौल नहीं है, तब तक ‘विकसित भारत’ का सपना अधूरा है। पिछले कुछ दशकों में भारत ने सीमा-पार आतंकवाद, नक्सलवाद और धार्मिक कट्टरपंथ का भारी दंश झेला है। हालांकि 2014 के बाद से आतंकी घटनाओं में भारी कमी आई है, लेकिन आतंकवाद का स्वरूप अब बदल चुका है। आज का आतंकवाद केवल बंदूकों और बमों तक सीमित नहीं है; यह डार्क वेब (Dark Web), क्रिप्टो-करेंसी (Cryptocurrency), लोन-वुल्फ अटैक (Lone-wolf attacks) और ड्रोन (Drones) तक पहुँच चुका है।

इस बदलते हुए और अदृश्य खतरे को जड़ से खत्म करने के लिए, भारत के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) ने एक अत्यंत ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है। भारत सरकार ने देश की पहली व्यापक और एकीकृत राष्ट्रीय एंटी-टेरर नीति ‘PRAHAAR’ (प्रहार) को आधिकारिक तौर पर जारी किया है।

1. ‘PRAHAAR’ (प्रहार) क्या है? नीति की पृष्ठभूमि और आवश्यकता (The Origin & Need)

भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) जैसे कड़े कानून मौजूद हैं, और NIA जैसी विश्वस्तरीय एजेंसियां काम कर रही हैं। फिर एक नई ‘राष्ट्रीय नीति’ की आवश्यकता क्यों पड़ी?

इसका सबसे बड़ा कारण था: विभिन्न एजेंसियों के बीच ‘साइलो’ (Silos) यानी अलग-थलग काम करने की प्रवृत्ति। अक्सर देखा गया है कि राज्य की पुलिस (Police), केंद्रीय खुफिया एजेंसियां (IB, RAW), वित्तीय खुफिया इकाइयां (FIU) और तकनीकी विंग्स (CERT-In) अपने-अपने स्तर पर काम करते थे। सूचनाओं के आदान-प्रदान (Intelligence sharing) में होने वाली देरी का फायदा उठाकर आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते थे।

‘PRAHAAR’ का अर्थ और विज़न:

‘PRAHAAR’ (Proactive, Resolute, And Holistic Action Against Radicalization & Terrorism) का मुख्य उद्देश्य इस ‘कम्युनिकेशन गैप’ को खत्म करना और पूरे देश की सुरक्षा ग्रिड को एक ही मंच (Single Platform) पर लाना है। यह नीति ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है—आतंकवाद के प्रति कोई नरमी नहीं, और आतंकियों को पनाह देने वाले या उनकी आर्थिक मदद करने वाले इकोसिस्टम का पूर्ण विनाश।

 राष्ट्रीय एंटी-टेरर नीति ‘PRAHAAR

2. पुरानी व्यवस्था बनाम ‘PRAHAAR’ नीति (तुलनात्मक विश्लेषण)

यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह नई नीति पुरानी कार्यप्रणाली से किस प्रकार भिन्न और अधिक मारक है:

सुरक्षा का पहलू (Aspect)पुरानी व्यवस्था (Reactive Approach)‘PRAHAAR’ नीति (Proactive Approach)
कार्रवाई का समयआतंकी हमले के बाद जांच और कार्रवाई शुरू होती थी।एआई और बिग डेटा की मदद से हमले से पहले ही खतरे को भाँपना और उसे बेअसर करना (Pre-emptive strikes)।
डेटा और इंटेलिजेंसएजेंसियां अपना डेटा साझा करने में संकोच करती थीं।NATGRID (National Intelligence Grid) के माध्यम से रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग अनिवार्य।
टेरर फंडिंग ट्रैकनकद और बैंक ट्रांसफर्स की मैन्युअल निगरानी।क्रिप्टो-करेंसी, हवाला और डार्क-वेब ट्रांजैक्शन की 24×7 ऑटोमेटेड मॉनिटरिंग।
रेडिकलाइजेशनकेवल गिरफ्तारियों पर जोर।‘डी-रेडिकलाइजेशन’ (De-radicalization) प्रोग्राम्स के जरिए भटके हुए युवाओं की मुख्यधारा में वापसी।
केंद्र-राज्य समन्वयराज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का टकराव।NIA को ‘सुप्रीम नोडल एजेंसी’ का दर्जा और जॉइंट टास्क फोर्स (JTF) का निर्माण।

3. प्रौद्योगिकी और AI का एकीकरण: अदृश्य दुश्मन से लड़ने का डिजिटल हथियार (Tech-Supremacy)

21वीं सदी का युद्ध मैदान (Battlefield) सीमा पर नहीं, बल्कि सर्वर रूम्स और इंटरनेट के ऑप्टिकल फाइबर में है। ‘PRAHAAR’ नीति का सबसे मजबूत स्तंभ इसकी तकनीकी सर्वोच्चता है।

A. बिग डेटा एनालिटिक्स (Big Data Analytics):

भारत की 140 करोड़ की आबादी में किसी एक स्लीपर सेल (Sleeper Cell) को खोजना भूसे के ढेर में सूई खोजने जैसा है। प्रहार नीति के तहत, एयरलाइन रिज़र्वेशन, बैंक ट्रांजैक्शन, इमिग्रेशन रिकॉर्ड्स और टेलीकॉम डेटा को बिग डेटा एनालिटिक्स के जरिए प्रोसेस किया जाएगा। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति अचानक डार्क वेब पर एक्टिव होता है और साथ ही भारी मात्रा में केमिकल खरीदता है, तो सिस्टम तुरंत ‘रेड अलर्ट’ (Red Alert) जारी कर देगा।

B. ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक (Drone & Anti-Drone Tech):

पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमाओं पर पाकिस्तान द्वारा ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स गिराने की घटनाएं आम हो गई थीं। इस नीति के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लेज़र-आधारित (Laser-based) और माइक्रोवेव एंटी-ड्रोन सिस्टम्स से लैस किया जा रहा है। ये सिस्टम सीमा पार से आने वाले किसी भी अनाधिकृत फ्लाइंग ऑब्जेक्ट को हवा में ही जाम (Jam) करके नष्ट कर देंगे।

C. सोशल मीडिया पेट्रोलिंग (Cyber Patrolling):

आतंकी संगठन ISIS और अल-कायदा युवाओं का ‘ब्रेनवाश’ (Brainwash) करने के लिए टेलीग्राम (Telegram) और इंस्टाग्राम (Instagram) जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं। प्रहार के तहत एक विशेष ‘साइबर-रैपिड एक्शन फोर्स’ (C-RAF) का गठन किया जाएगा, जो AI बॉट्स की मदद से चरमपंथी सामग्री (Extremist content) को वायरल होने से पहले ही ब्लॉक कर देगी।

 राष्ट्रीय एंटी-टेरर नीति ‘PRAHAAR

4. टेरर फंडिंग और नार्को-टेररिज्म: आतंकवाद की ‘ऑक्सीजन’ को काटना

बिना पैसों के कोई भी आतंकी संगठन 24 घंटे भी नहीं टिक सकता। हथियार खरीदने, लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करने और स्लीपर सेल्स को पालने के लिए करोड़ों रुपये की आवश्यकता होती है। प्रहार नीति का स्पष्ट मानना है कि “बंदूक चलाने वाले से ज्यादा खतरनाक वह व्यक्ति है जो बंदूक खरीदने के लिए पैसे देता है।”

A. नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism) पर प्रहार:

पड़ोसी देश भारत के युवाओं को नशे की लत में धकेलने और उससे मिलने वाले पैसे से आतंकवाद को फाइनेंस करने की ‘डबल गेम’ खेल रहे हैं। इस नीति के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), NIA और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक संयुक्त त्रिकोण (Joint Task Force) बनाया गया है। अब ड्रग्स की छोटी से छोटी खेप पकड़े जाने पर भी उसे ‘टेरर-लिंक’ (Terror-link) के एंगल से जांचा जाएगा।

B. हवाला और क्रिप्टो पर सर्जिकल स्ट्राइक:

आतंकी अब हवाला की जगह ब्लॉकचेन (Blockchain) और क्रिप्टोकरेंसी (Bitcoin, Monero) का उपयोग कर रहे हैं। प्रहार नीति में ‘क्रिप्टो-इंटेलिजेंस यूनिट’ (CIU) का प्रावधान है, जो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों (जैसे Interpol और FBI) के साथ मिलकर अवैध क्रिप्टो वॉलेट्स को फ्रीज़ करने का काम करेगी।

5. कानूनी और ढांचागत सुधार: NIA की शक्ति में असीमित विस्तार (The Legal Muscle)

कानूनी खामियों का फायदा उठाकर आतंकी अक्सर अदालतों से बरी हो जाते थे। इसे रोकने के लिए प्रहार नीति में ‘लॉ एंड ऑर्डर’ (Law and Order) के ढांचे को पूरी तरह से अपग्रेड किया गया है।

  • NIA की ‘सुपरमेसी’ (Supremacy of NIA): अब किसी भी राज्य में होने वाली कोई भी ऐसी घटना (चाहे वह टारगेट किलिंग हो, बम धमाका हो या बड़ा साइबर हमला), जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो, स्वतः ही (Suo-motu) NIA के अधिकार क्षेत्र में आ जाएगी। राज्य की पुलिस इसमें दखलंदाज़ी करने के बजाय NIA को सपोर्ट करेगी।
  • स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स (Fast-track Courts): आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई अब सालों तक नहीं लटकेगी। ‘PRAHAAR’ नीति के तहत हर राज्य में विशेष आतंकवाद-रोधी अदालतों का गठन अनिवार्य किया गया है, जहाँ मामलों की डे-टू-डे (Day-to-day) सुनवाई होगी।
  • कनविक्शन रेट (Conviction Rate) का लक्ष्य: वर्तमान में NIA का कनविक्शन रेट 94% के आसपास है। इस नीति के तहत फोरेंसिक सबूतों (Forensic evidence) और डिजिटल एविडेंस को इतना मजबूत किया जाएगा कि यह दर 99% तक पहुँच सके।

6. सीमा प्रबंधन और घुसपैठ: अभेद्य ‘स्मार्ट बॉर्डर’ का निर्माण (Smart Border Management)

भारत की सीमाएँ पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे अस्थिर पड़ोसियों से लगती हैं। भौगोलिक विषमताओं (पहाड़, नदियां, घने जंगल) के कारण हर इंच पर इंसानी पहरा मुमकिन नहीं है।

  • CIBMS (Comprehensive Integrated Border Management System):प्रहार नीति CIBMS को युद्ध-स्तर पर लागू करने की बात करती है। इसके तहत सीमाओं पर लेज़र दीवारें (Laser Walls), थर्मल इमेजर (Thermal Imagers), और अंडरग्राउंड सेंसर्स (Underground sensors) लगाए जा रहे हैं। यदि कोई आतंकी घने कोहरे या अंधेरे में सीमा पार करने की कोशिश करेगा, तो इंसान की नज़र भले ही चूक जाए, मशीन का अलार्म तुरंत बज उठेगा।
 राष्ट्रीय एंटी-टेरर नीति ‘PRAHAAR

7. डी-रेडिकलाइजेशन (De-radicalization): समाज और युवाओं को बचाना

प्रहार नीति का सबसे मानवीय और रणनीतिक रूप से परिपक्व पहलू इसका ‘सॉफ्ट पावर’ दृष्टिकोण है। सरकार मानती है कि हर भटका हुआ युवा जन्म से आतंकी नहीं होता; उसे भड़काया जाता है।

  • काउंसलिंग और पुनर्वास (Rehabilitation):जो युवा ऑनलाइन प्रोपेगैंडा के शिकार होकर आतंकी गुटों में शामिल होने की सोच रहे हैं, उन्हें पुलिस गिरफ्तार करने के बजाय मनोवैज्ञानिकों (Psychologists), धर्मगुरुओं और परिवार की मदद से ‘डी-रेडिकलाइज’ करेगी। उन्हें रोजगार के अवसर देकर मुख्यधारा में वापस लाया जाएगा।
  • कम्युनिटी पुलिसिंग (Community Policing):आतंकवाद को बिना स्थानीय समाज की मदद के नहीं हराया जा सकता। प्रहार नीति में नागरिकों को ‘सुरक्षा का पहला घेरा’ (First line of defense) माना गया है। संदिग्ध गतिविधियों की गुमनाम रिपोर्टिंग (Anonymous reporting) के लिए विशेष मोबाइल ऐप्स और टॉल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।

8. कूटनीतिक आक्रामकता: वैश्विक मंच पर भारत की हुंकार (Diplomatic Aggression)

‘PRAHAAR’ केवल घरेलू नीति नहीं है; यह भारत की विदेश नीति (Foreign Policy) का भी विस्तार है।

  • “आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं” (Terror & Talks can’t go together):भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और FATF (Financial Action Task Force) जैसे वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जैसे प्रायोजक देशों को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग (Isolate) करने की मुहिम तेज़ कर दी है।
  • ग्लोबल कोलिशन (Global Coalition):प्रहार नीति के तहत भारत फ्रांस, अमेरिका, इजरायल और यूएई (UAE) जैसे मित्र देशों के साथ आतंकवाद-रोधी अभ्यासों (Anti-terror drills) और रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को बढ़ा रहा है। जब दुनिया भर का डेटा बेस एक साथ काम करेगा, तो आतंकियों के लिए छिपने की कोई जगह नहीं बचेगी।

2047 के ‘सुरक्षित और विकसित भारत’ की नींव

गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई ‘PRAHAAR’ नीति भारत के सुरक्षा इतिहास में एक ‘वाटरशेड मोमेंट’ (Watershed moment – ऐतिहासिक मोड़) है। यह नीति स्पष्ट करती है कि भारत अब केवल घाव सहने और बचाव करने वाला देश नहीं रहा; अब भारत खतरे के पनपने से पहले ही उस पर सबसे भारी चोट (प्रहार) करने में सक्षम है।

टेक्नोलॉजी, कड़े कानून, वैश्विक कूटनीति और समाज के सहयोग के इस चतुर्मुखी (Four-pronged) दृष्टिकोण के साथ, भारत एक ऐसा ‘सुरक्षा कवच’ तैयार कर रहा है जिसे भेद पाना किसी भी आतंकी संगठन के लिए नामुमकिन होगा। जब देश का नागरिक निडर होकर अपने आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों की ओर बढ़ेगा, तभी 2047 तक ‘विकसित भारत’ का संकल्प अपनी पूर्णता को प्राप्त करेगा। ‘प्रहार’ सिर्फ एक नीति का नाम नहीं है; यह 140 करोड़ भारतीयों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

By Vivan Verma

विवान तेज खबरी (Tez Khabri) के समाचार रिपोर्टर हैं, जो ब्रेकिंग न्यूज़ और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को कवर करते हैं। विवान तथ्यात्मक रिपोर्टिंग और तेज अपडेट के लिए जाने जाते हैं और प्रशासनिक व जनहित से जुड़े मामलों पर नियमित लेखन करते हैं।

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