इंदौर के बालीपुर धाम क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ दूषित पानी पीने की वजह से मात्र 6 महीने के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि नगर निगम द्वारा सप्लाई किया जा रहा पानी गंदा और बदबूदार था, जिसे पीने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी जान चली गई।
इस घटना ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना का पूरा विवरण
- स्थान: इंदौर का बालीपुर धाम इलाका।
- पीड़ित: 6 महीने का मासूम बच्चा।
- लक्षण: परिवार के अनुसार, बच्चे को गंदा पानी पीने के बाद अचानक तेज उल्टियां शुरू हुईं।
- मौत: हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिवार का आरोप: बच्चे के माता-पिता का कहना है कि पिछले कई दिनों से इलाके में जो पानी आ रहा है, वह पीने लायक नहीं है। पानी में ड्रेनेज जैसी बदबू आ रही थी। इसी पानी के सेवन से बच्चे को इन्फेक्शन हुआ और देखते ही देखते उसकी जान चली गई।
क्षेत्र में बीमारी का प्रकोप
सिर्फ यह बच्चा ही नहीं, बल्कि उस इलाके के कई अन्य लोग भी दूषित पानी के कारण बीमार पड़ रहे हैं।
- रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में डायरिया और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
- स्थानीय निवासियों का दावा है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की कि पानी की पाइपलाइन ड्रेनेज लाइन से मिल गई है, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

प्रशासन की कार्रवाई और जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए इंदौर नगर निगम (IMC) और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है:
- सैंपल की जांच: स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र से पानी के नमूने (Samples) इकट्ठा किए हैं ताकि यह पुष्टि हो सके कि पानी में किस तरह का बैक्टीरिया या प्रदूषण मौजूद है।
- मेडिकल कैंप: प्रभावित इलाके में इमरजेंसी मेडिकल कैंप लगाया गया है ताकि अन्य बीमार लोगों का तुरंत इलाज किया जा सके।
- जांच के आदेश: नगर निगम कमिश्नर ने क्षेत्र की पाइपलाइनों की जांच करने और लीकेज को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए हैं।
दूषित पानी से बच्चों को खतरा क्यों?
6 महीने के बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बहुत कम होती है। दूषित पानी में मौजूद ई-कोलाई (E. coli) या अन्य घातक बैक्टीरिया बच्चों के पेट में संक्रमण पैदा कर देते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (Dehydration) हो जाती है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिलने पर मौत का खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष और सवाल
इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव प्राप्त है, वहाँ इस तरह की घटना होना प्रशासन के लिए एक बड़ा सवालिया निशान है। स्वच्छता सिर्फ सड़कों पर ही नहीं, बल्कि नागरिकों के नलों तक पहुंचने वाले पानी में भी दिखनी चाहिए।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए?
